भुवनेश्वर , मई 10 -- ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) और एसयूएम अस्पताल में नैदानिक प्रतिरक्षा विज्ञान एवं संधिवात विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) प्रदीप्त शेखर पात्रो ने ल्यूपस को एक कम पहचानी गई ऑटोइम्यून बीमारी बताते हुए कहा कि यह बीमारी मुख्य रूप से 20 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को प्रभावित करती है।
उन्होंने रविवार को कहा कि उचित चिकित्सकीय देखभाल और नियमित निगरानी से मरीज़ इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और सामान्य जीवनशैली बनाए रख सकते हैं। शुरुआती जांच और समय पर इलाज से ल्यूपस के मरीज़ सामान्य जीवन जी सकते हैं।
प्रो. (डॉ.) पात्रो ने विश्व ल्यूपस दिवस के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मानव शरीर में इम्यून सिस्टम कोशिकाओं का एक विशाल नेटवर्क होता है, जिसे इंसानों को पर्यावरण से बचाने और शरीर की अपनी कोशिकाओं को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए बनाया गया है, लेकिन कभी-कभी यह सिस्टम भ्रमित करने वाले संकेत भेजता है, जिससे शरीर की सुरक्षा प्रणाली अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है।
उन्होंने कहा कि इससे ऑटोइम्यून बीमारियाँ होती हैं, जिनमें से एक ल्यूपस भी है, जिसे 'सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस' के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ल्यूपस का पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि अलग-अलग मरीज़ों में अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह मरीज़ की त्वचा, जोड़ों, रक्त, हृदय, गुर्दे और यहाँ तक कि मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है।
इस मौके पर आईएमएस और एसयूएम अस्पताल की ओर से एक रैली का आयोजन किया। इसमें डॉक्टरों, नर्सों और हेल्थकेयर कर्मचारियों सहित लगभग 200 लोग शामिल हुए, जिन्होंने व्यस्त मास्टर कैंटीन चौक से राम मंदिर चौक तक मार्च किया। इस मार्च का मकसद ल्यूपस बीमारी और उससे लड़ने के तरीकों के बारे में जागरूकता फैलाना था।
ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरामा पाढ़ी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक बाबू सिंह भी इस रैली में शामिल हुए। इस मौके पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) पुष्पराज सामंतसिंहार और प्रो. (डॉ.) पात्रो भी मौजूद थे।
श्रीमती पाढ़ी ने कहा कि ल्यूपस ज़्यादातर युवा लड़कियों को प्रभावित करता है, और इस बीमारी से लड़ने के लिए इसके बारे में जागरूकता फैलाना बहुत ज़रूरी है।श्री सिंह ने ल्यूपस के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और इस बीमारी का इलाज मुहैया कराने के लिए आईएमएस और एसयूएम अस्पताल की सराहना की।
प्रो. (डॉ.) पात्रो ने बताया कि कि यह बीमारी अक्सर गालों की हड्डियों पर लाल रंग के चकत्ते (रैश) के रूप में सामने आती है। ये चकत्ते सपाट या उभरे हुए हो सकते हैं, और अपने आकार के कारण इन्हें 'बटरफ्लाई रैश' कहा जाता है। यह ल्यूपस का एक खास लक्षण है। उन्होंने बताया कि ल्यूपस को 'महान नकलची' भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। इससे भ्रम पैदा होता है और बीमारी की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, यह बीमारी संक्रामक नहीं है, लेकिन मरीज़ों को धूप से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि धूप ल्यूपस की समस्या को और बढ़ा देती है।
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