नैनीताल , जून 19 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिले के रामगढ़ विकासखंड स्थित लोशज्ञानी गांव में कथित रूप से बिना अनुमति सड़क निर्माण के आरोप में दर्ज मुकदमे के मामले में याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार से मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश भी दिए हैं।मामला रामगढ़ विकासखंड के ग्राम लोशज्ञानी से जुड़ा है, जहां ग्रामीण लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं। याचिका के अनुसार सड़क नहीं बनने से नाराज करीब 250 ग्रामीणों ने जनसहयोग और श्रमदान के माध्यम से तोक काफलधारी से लोशज्ञानी मंदिर तक सड़क निर्माण का प्रयास शुरू किया था। बाद में प्रशासन ने यह कहते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया कि सड़क स्वीकृत नहीं है।
प्रशासन का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान बिना अनुमति सरकारी भूमि का उपयोग किया गया, सरकारी संपत्ति और संरक्षित पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाया गया तथा निर्माण कार्य में जेसीबी मशीन का इस्तेमाल भी नियमों के विपरीत किया गया।
बताया गया कि ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने पर लाखन सिंह नेगी ने एक वीडियो संदेश में सड़क निर्माण के लिए जेसीबी मशीन उपलब्ध कराने की बात कही थी। इसके बाद शिकायतकर्ता प्रकाश सैनी की ओर से भवाली थाने में लाखन सिंह नेगी के खिलाफ विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया।
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