भिण्ड , सितम्बर 12 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड में राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक विवादों के बीच रिश्ते फिर जुड़ते नजर आए। कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग और समझाइश के बाद कई दंपतियों ने अपने मतभेद खत्म कर साथ रहने का फैसला किया।

इनमें सबसे भावुक पल 76 वर्षीय पूनादेवी गुप्ता और उनके पति राधेश्याम गुप्ता के पुनर्मिलन का रहा। दोनों ने न्यायालय कक्ष में एक-दूसरे को माला पहनाई और आगे साथ रहने का संकल्प लिया।

सेना से सेवानिवृत्त पेंशनर राधेश्याम गुप्ता के खिलाफ उनकी पत्नी पूनादेवी ने भरण-पोषण की याचिका दायर की थी। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान दोनों से बातचीत कर मतभेद दूर करने और आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया। बातचीत के बाद दोनों पुराने मतभेद भुलाकर साथ रहने के लिए सहमत हुए। इसके बाद न्यायालय कक्ष में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कालू सिंह बारिया और प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय दिलीप गुप्ता की पहल पर राजीनामा करने वाले दंपतियों को पौधे भी भेंट किए गए।

न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने दंपतियों से कहा कि जिस तरह पौधे की देखभाल करते हैं, उसी तरह रिश्तों की भी देखभाल करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में छोटी-मोटी अनबन होने पर विवाद को अदालत तक ले जाने के बजाय बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करें। लोक अदालत में हुई इस पहल ने कानूनी विवादों के बीच रिश्तों की अहमियत को सामने रखा। आपसी सहमति से विवाद खत्म करने वाले कई दंपति हाथों में पौधे लेकर मुस्कुराते हुए घर लौटे। पौधा उन्हें अपने रिश्ते को संभालने और आगे साथ चलने का संदेश देता रहा।

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