नयी दिल्ली , फरवरी 04 -- लोकसभा में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी विपक्षी दलों के सदस्यों का हंगामा जारी रहा और कार्यवाही दूसरी बार अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों ने विपक्ष के कुछ सदस्यों के निलंबन के विरुद्ध नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया और कार्यवाही दाेपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी थी।
कार्यवाही पुन: शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने पूर्व सेनाध्यक्ष की अप्रकाशित पुस्तक के अंशों को उद्धृत करते हुए नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। इसी बीच आसन की अनुमति से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बारे में एक वक्तव्य पढ़ा, जाे शोरशराबे के कारण स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दिया।
अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की लेकिन विपक्षी दलों के सदस्यों पर इसका कोई असर न देखते हुए उन्होंने कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
दोपहर 12 बजे सदन समवेत होते ही, कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के सदस्य अपने-अपने स्थानों पर खड़े होकर शोरशराबा और नारेबाजी करने लगे। उनके हाथ में बड़े-बड़े बैनर भी थे। विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री का नाम लेकर नारे लगा रहे थे।
कई विपक्षी सदस्य बैनर के साथ आसन के समक्ष आ गये थे। बैनरों पर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुन्द नरवणे के चित्र थे। समाजवादी पार्टी के सदस्य अहिल्या बाई होल्कर का चित्र लेकर वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर उनकी प्रतिमा कथित रूप से खंडित किये जाने का विरोध कर रहे थे। विपक्ष ने इन मुद्दों पर मंगलवार को भी हंगामा किया था।
श्री गोयल का वक्तव्य पूरा होने के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने शोरशराबा कर रहे सदस्यों से कहा कि उनके इस आचरण से लोगों का लोकतंत्र में भरोसाकम होगा। उनका विरोध करने का यह तरीका कतई उचित नहीं है। सदन नियमों-प्रक्रियाओं से चलता है। सदन में पहले भी विरोध हुआ है, लेकिन इस तरह मर्यादायें नहीं तोड़ी गयीं।
श्री बिरला ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के कारण विरोध होते हैं, लेकिन इस तरह से सदन की गरिमा और मर्यादा का हनन नहीं किया जाता। यह सदन सभी का है और सभी सदस्यों की जिम्मेदारी इसकी गरिमा को बनाये रखने की है। सदन का इस तरह अपमान करना उचित नहीं है।
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