नयी दिल्ली , अक्टूबर 22 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और सुनियोजित तरीके से कार्यवाही बाधित करने को लोकतंत्र के लिए अनुचित बताते हुए कहा है कि घरेलू और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया की संसदों के बीच संवाद और विचार-विमर्श आवश्यक है।

श्री बिरला राजधानी में बारहवें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक की जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गुरुवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संवाद ही संसदीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण शर्त है। उन्होंने विश्वस्तर पर संसदों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रत्येक देश की संप्रभुता और विशिष्ट व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए आपस में संवाद से सकारात्मक परिणाम हासिल हो सकते हैं। इस तरह हम एक दूसरे की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं से सीख सकते हैं और आपस की चर्चाओं से वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अपनी-अपनी सरकारों के लिए संदेश दे सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के दो धड़ों के बीच मान्यता को लेकर चल रहे विवाद के संबंध में एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रक्रिया चल रही है। हमने संबंधित सदस्यों से जवाब मांगा हैं और जवाब आते ही इस बारे में आगे निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में विलम्ब के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सदस्यों के जवाब की प्रतीक्षा है और कार्यवाही चल रही है।

संसद के सत्रावसान में विलंब संबंधी सवाल पर श्री बिरला ने कहा कि इसके लिए अनुच्छेद 85 में व्यवस्था है। सत्रावसान के लिए कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई है। यह कहे जाने पर कि इस बार सत्रावसान में सबसे बड़ा विलम्ब हुआ है, तो अध्यक्ष ने कहा कि इससे पहले भी इससे ज्यादा समय तक सत्रावसान नहीं किये जाने के उदाहरण हैं।

लोकसभा सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'यूनीवार्ता' को बताया कि चौदहवीं लोकसभा के दौरान वामपंथी दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तो उस समय सत्रावसान इससे भी ज्यादा समय तक नहीं किया गया था।

इस समय चर्चा यह है कि सरकार परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने की रणनीति पर काम कर रही है और इसी लिए अभी तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित बारहवें ब्रिक्स संसदीय मंच में सभी देशों की सहमति से संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा। ब्राजील में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद वहां संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया था। भारत भी साझा मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए भागीदार देशों के साथ संवाद करेगा।

श्री बिरला ने आतंकवाद को गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए उम्मीद जताई कि सम्मेलन में इस मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसदीय संवाद के माध्यम से साझा समस्याओं के समाधान तलाशे जा सकते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने विभिन्न देशों के साथ संसदीय संबंध मजबूत करने के लिए संसदीय मैत्री समूहों के गठन की पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है और अब तक 64 देशों के साथ ऐसे समूहों का गठन किया जा चुका है। सभी भागीदार देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित किए गए हैं और इन द्विपक्षीय समूहों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।रूस की एक पत्रकार के सवाल पर श्री बिरला ने कहा वह इस सम्मेलन में भाग लेने वाले रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान भारत-रूस संसदीय मैत्री समूह की बैठक भी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस का संसदीय अनुभव और अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों में उसकी भागीदारी दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने में योगदान देगी।

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