नैनीताल , सितंबर 03 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने छह से अधिक लॉ कालेजों को संबद्धता के मामले में सीधे-सीधे कोई राहत नहीं दी है। सभी याचिकाकर्ताओं को संबद्ध विश्वविद्यालय के समक्ष अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय उस पर कानून के अनुसार दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। अदालत ने रुड़की के चमन लॉ कॉलेज समेत कुल सात लॉ कालेजों की ओर से दायर याचिकाओं पर बुधवार को एक साथ सुनवाई की। आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध हो पायी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से विश्वविद्यालय को संबद्धता के मामले में आवश्यक निर्देश के साथ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की मंजूरी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में सुविधा देने तथा देरी के कारण लगने वाले विलंब शुल्क (लेट फीस) या पेनल्टी से राहत देने की मांग की गयी।
इसी के साथ ही याचिकाकर्ताओं की ओर से बीसीआई की ओर से आवेदन की निर्धारित अंतिम तिथि 31 जुलाई को बढ़ाने और संबंधित सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मांग पर सीधे-सीधे कोई अंतिम निर्देश देने के बजाय याचिकाकर्ताओं को विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए। अदालत ने विश्वविद्यालय को स्पष्ट निर्देश दिया कि 08 सितंबर तक दिए गए अभ्यावेदनों पर दो सप्ताह के भीतर कानून सम्मत फैसला ले। साथ ही अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इससे याचिकाकर्ताओं के दोबारा एचसी आने का रास्ता बंद नहीं होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित