श्रीनगर , मई 29 -- लोकसभा के दो सांसदों ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले पहुंच कर तिहाड़ जेल में बंद बारामूला के सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद के परिवार से मुलाकात की और उनके पिता के निधन पर संवेदना व्यक्त की।
इस महीने की शुरुआत में श्री इंजीनियर रशीद के पिता का निधन हो गया था।
इस प्रतिनिधिमंडल में दमन और दीव से निर्दलीय सांसद उमेश बाबूभाई पटेल और बिहार के बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद सुधाकर सिंह शामिल थे। इन दोनों सांसदों ने मावर लैंगेट स्थित इंजीनियर रशीद के आवास का दौरा किया और वहां मौजूद परिवार के सदस्यों, अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के नेताओं और स्थानीय निवासियों से बातचीत की।
श्री इंजीनियर रशीद टेरर फंडिंग के एक मामले में फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाल ही में उनके पिता के निधन के बाद उन्हें दो जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी गयी है।
इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दोनों सांसदों ने कहा कि देश भर में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जो जम्मू-कश्मीर के लोगों के दर्द और तकलीफ़ों को सचमुच महसूस करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सामंजस्य के लिए लोकतांत्रिक भागीदारी और गंभीर बातचीत बेहद जरूरी है।
सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कश्मीर के लोगों ने बहुत कुछ झेला है और उनकी आवाज़ को पूरी ईमानदारी, सम्मान और गंभीरता के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और मानवाधिकार मुद्दों को लेकर संसद में इंजीनियर रशीद की ओर से लगातार उठायी जा रही चिंताओं की सराहना की।
उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ सार्थक बातचीत न कर अलगाव की भावना को और बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर रशीद को लगातार जेल में बंद रखना केंद्र और कश्मीर के बीच के जुड़ाव को कमजोर कर रहा है। उन्होंने इंजीनियर रशीद को तुरंत रिहा करने की मांग की, ताकि वह उन लोगों की सेवा करना जारी रख सकें, जिन्होंने उन पर इतना अधिक भरोसा जताया है।
सांसदों ने समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से भी मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि भारत के लोग कश्मीरियों के दुश्मन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन सभी प्रतिबद्धताओं और समझौतों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ सम्मान किया जाना चाहिए, जो केंद्र और राज्य के लोगों के बीच संबंधों का आधार रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और शिकायतों को दूर करने के लिए बातचीत, सामंजस्य और लोकतांत्रिक भागीदारी की आवश्यकता को एक बार फिर दोहराया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित