श्रीनगर , अक्टूबर 02 -- लद्दाख के बेहद ठंडे मरुस्थल लेह की बंजर जमीन पर पहली बार केसर उगाने की तैयारी की गयी है। यहां चलाई जा रही 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' पहल के तहत स्पितुक फरका के कमांड एरिया में हाल ही में प्रीमियम ईरानी केसर के लगभग 800 किलोग्राम कॉर्म्स (लगभग 90,000 बल्ब) रोपे गये हैं।

कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस पायलट प्रोजेक्ट से केसर की अच्छी पैदावार होगी। गौरतलब है कि कश्मीर के पम्पोर में सदियों से उगाया जाने वाला केसर दुनिया के सबसे कीमती मसालों में से एक है, जो अपने विशिष्ट रंग, सुगंध और स्वाद के लिए जाना जाता है, जबकि ईरानी केसर उससे जरा अलग होता है।

अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में लिलियम फूलों के खेतों की शानदार सफलता से उत्साहित होकर उपराज्यपाल सक्सेना ने लद्दाख में केसर उगाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों और युवाओं की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पारंपरिक कृषि पद्धतियों में विविधीकरण लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से निर्देशित है।लद्दाख में केसर का रोपण उच्च मूल्य वाली पुष्पकृषि एक सफल प्रयोग पर आधारित है और इससे विशेष रूप से लेह में लिलियम और ग्लेडियोलस की बड़े पैमाने पर खेती का रास्ता खुला है। इसने किसानों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर खोले हैं।

पायलट आधार पर केसर की यह खेती लेह के स्पितुक फरका स्थित कमांड एरिया गेट नंबर 27 में की जा रही है। इस उद्देश्य के लिए आठ से 10 सेमी परिधि, 2.5 से तीन सेमी या उससे बड़े व्यास और 10 ग्राम या उससे अधिक वजन वाले उच्च गुणवत्ता वाले ईरानी केसर कॉर्म्स या घनकंद रोपे गये हैं, जिन्हें सबसे अच्छे कॉर्म्स माना जाता है। इन विशिष्टताओं को उच्च गुणवत्ता वाले केसर उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

श्री सक्सेना ने कहा कि केसर रोपण में लद्दाख की अनूठी उच्च ऊंचाई वाली कृषि-जलवायु परिस्थितियों के तहत एक और उच्च मूल्य वाली फसल शुरू करके हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इससे इस भ्रम को भी तोड़ा जा सकेगा कि लद्दाख में केसर नहीं उगाया जा सकता और बंजर या क्षरित भूमि का पुनरुद्धार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, " हमारा प्रयास क्षरित और बंजर भूमि को उत्पादक संपत्तियों में बदलना और हमारे किसानों के लिए नये अवसर पैदा करना है। केसर की शुरुआत फसल विविधीकरण में एक और महत्वपूर्ण प्रयोग है, जो एक प्रीमियम-मूल्य वाली फसल के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता खोल सकता है। "भारत में केसर की खेती के लिए मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर ही जाना जाता है। यह राज्य केसर की देश के कुल पैदावार का लगभग 90 प्रतिशत उगाता है। लद्दाख में इसकी शुरुआत इस क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों के लिए इसकी उपयुक्तता का आकलन करने और इसकी आर्थिक क्षमता का पता लगाने के लिए एक पायलट के रूप में की जा रही है।

केसर रोपण का यह स्थल लेह में पुनरुद्धार की जा रही 800 एकड़ भूमि का हिस्सा है, जिसे बगल की इगू-फे सिंचाई नहर से ताजा पानी लाकर उपजाऊ बनाया जा रहा है, जिसे हाल ही में बहाल और चालू किया गया था।

उपराज्यपाल के निर्देशों पर, नहर से अप्रयुक्त या अतिरिक्त पानी को बंजर भूमि की ओर मोड़ा जा रहा है ताकि इसकी नमी बढ़ सके और यह खेती के योग्य बन सके। कमांड एरिया में प्रोजेक्ट हिम सरोवर के हिस्से के रूप में चार पानी के तालाब भी हैं, जो स्थल के निकट स्थित हैं और इनकी संयुक्त भंडारण क्षमता लगभग 2.4 करोड़ लीटर है।

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