तेहरान , जून 19 -- अमेरिका और ईरान के प्रमुखों के हस्ताक्षरित युद्धविराम को लागू करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक को हाल ही में टाल दिया गया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि यह नाजुक समझौता टूटने की कगार पर पहुँच सकता है।
यह बातचीत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली थी। इसमें उस युद्धविराम समझौते के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होनी थी जिसे अमेरिका और ईरान ने बुधवार को डिजिटल माध्यम से औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। इस देरी ने समझौते के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में जारी भारी लड़ाई के बीच ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने से रोक दिया है। उसने बातचीत में अपनी भागीदारी को जमीनी हालातों से जोड़ा है। उसके अनुसार लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
लेबनान के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार रात और शुक्रवार को हुए इजरायली हमलों में कम से कम 18 लोगों के मारे जाने की रिपोर्टें है। ईरान समर्थित सशस्त्र समूह और राजनीतिक आंदोलन हिजबुल्ला ने इन झड़पों को हाल के महीनों की सबसे भीषण लड़ाई बताया है।
युद्धविराम के ढांचे को अस्थायी रूप से समर्थन देने के संकेत देते हुए भी ईरान ने इस बात पर जोर दिया है कि उसकी मंजूरी सभी मोर्चों पर शांति की शर्त से जुड़ी है। शुक्रवार को ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा कि भविष्य की कोई भी चर्चा देश की "लक्ष्मण रेखा" के अधीन होगी। बातचीत के दौरान ईरान की प्रमुख मांगों में से एक लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को समाप्त करना रहा है।
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, श्री गालिबाफ ने कहा, "अगर दुश्मन अपनी सीमाओं को पार करने की कोशिश करता है, तो हमने साबित कर दिया है कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं और हम मुंहतोड़ जवाब देने में कोई संकोच नहीं करेंगे।" एक अलग घटनाक्रम में, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री जहाजों के यातायात को लेकर कुछ उपायों की घोषणा की है।
सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, परिषद ने कहा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की शर्तों के तहत, इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अगले 60 दिनों के लिए पारगमन शुल्क से छूट दी जाएगी और इसका खर्च ईरानी सरकार खुद उठाएगी। इसमें कहा गया है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अपने अनुरोध फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण को भेजने होंगे।
परिषद ने कहा, "विशिष्ट परिस्थितियों और पारगमन मार्ग पर सुरक्षा खतरों को देखते हुए, तथा सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने व समुद्री दुर्घटनाओं को रोकने के लिए, जहाजों का घोषित मार्ग और घोषित समय पर ही गुजरना आवश्यक है।" उन्होंने आश्वासन दिया कि इस जलमार्ग में यातायात धीरे-धीरे बढ़ेगा। इस मार्ग से गुजरने के तकनीकी विवरण की घोषणा संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से की जाएगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित