तेहरान/वॉशिंगटन , मार्च 29 -- ईरान युद्ध आज 30वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस बीच लेबनान में इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों की मौत और ईरान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को अमेरिका-इजरायली सेना के निशाना बनाये जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
ईरान ने इन हमलों को 'वैश्विक चेतना के लिए चेतावनी' और अपनी 'वैज्ञानिक नींव को पंगु बनाने की साजिश' करार देते हुए जवाबी कार्रवाई के तौर पर क्षेत्र में स्थित अमेरिकी-इजरायली विश्वविद्यालयों को वैध सैन्य लक्ष्य घोषित कर दिया है।
इसके साथ ही, अमेरिका के ईरान में किये गये व्यापक हवाई हमलों और संभावित जमीनी अभियान की तैयारियों ने इस एक महीने पुराने संघर्ष को और अधिक घातक बना दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जेज़्ज़ीन शहर में 'अल मनार' और 'अल मयादीन' टीवी के पत्रकार श्री अली शोयेब, सुश्री फातिमा और श्री मोहम्मद फेटोनी की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। श्री अराघची ने इसे 'लक्षित हत्या' बताते हुए कहा कि यह सच्चाई की आवाज को खामोश करने का प्रयास है। वहीं इजरायली सेना ने अली शोयेब की मौत की पुष्टि करते हुए दावा किया कि वह पत्रकार के रूप में वह हिज्बुल्लाह का सदस्य था। लेबनान में संघर्ष शुरू होने के बाद पत्रकारों को निशाना बनाने का यह दूसरा बड़ा मामला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहरा गयी है।
शैक्षणिक संस्थानों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हुए अमेरिका-इजरायल हमले के बाद आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि अब पश्चिम एशिया में मौजूद सभी अमेरिकी-इजरायली विश्वविद्यालय उसके लिए वैध लक्ष्य हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि पिछले 30 दिनों के अवैध युद्ध के दौरान इस्फ़ाहान और तेहरान के अनुसंधान केंद्रों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है, ताकि देश की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट किया जा सके। उन्होंने अमेरिका के 'परमाणु खतरे' वाले दावों को महज एक दुर्भावनापूर्ण बहाना बताया है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने खुलासा किया है कि उसने इस सैन्य अभियान के दौरान अब तक ईरान के 11,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किये हैं, जिनमें 150 से अधिक क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए जहाज शामिल हैं।
अमेरिकी वायु सेना इस दौरान 11,000 से अधिक उड़ानें भर चुकी है। 'वाशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग अब ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले एक बड़े जमीनी अभियान की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए युद्धपोत 'यूएसएस त्रिपोली' पहले ही क्षेत्र में पहुंच चुका है।
परमाणु सुरक्षा के मोर्चे पर, वियना में रूस के स्थायी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु केंद्रों पर रेडियेशन के स्तर की निगरानी कर रहा है और किसी भी खतरे की स्थिति में वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सूचित करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि बुशेहर और नतान्ज केंद्रों पर हुए पिछले हमलों की जानकारी भी सबसे पहले ईरान ने ही साझा की थी। श्री उल्यानोव ने भरोसा जताया कि परमाणु सुरक्षा के मामले में दोनों पक्षों के बीच राजनयिक संपर्क बना हुआ है।
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