यरुशलम/तेहरान , जून 16 -- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि लेबनान में इजरायली सेना (आईडीएफ) की लगातार मौजूदगी अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए समझौता ढांचे का उल्लंघन है, जिस पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं।

श्री अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा कि युद्धविराम की घोषणा सभी मोर्चों पर लागू मानी गई थी और इसमें लेबनान को विशेष रूप से शामिल किया गया था।

उन्होंने ईरानी सरकारी मीडिया पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा, "जब युद्धविराम हुआ तो हमने सभी मोर्चों पर इसकी घोषणा की थी, खासकर लेबनान को ध्यान में रखते हुए। लेबनानी क्षेत्र में किसी भी तरह का लगातार कब्जा हमारी नजर में समझौता ज्ञापन का उल्लंघन होगा।"श्री अराघची ने कहा कि ईरान की दृष्टि में इस समझौते के पक्षकार एक ओर अमेरिका और इजरायल हैं, जबकि दूसरी ओर ईरान और हिजबुल्ला।

उन्होंने कहा, "मैं एक महत्वपूर्ण बात पर जोर देना चाहता हूं। हमारे विचार में इस समझौता ज्ञापन के दो पक्ष हैं - एक तरफ अमेरिका और इजरायल, दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्ला।"इजरायल और अमेरिका दोनों ही लेबनान के मुद्दे को इस समझौते का हिस्सा नहीं मानते और इसे अलग विषय बताते हैं, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार समझौते की एक धारा में इस मुद्दे का उल्लेख किया गया है।

गौरतलब है कि इजरायल कई महीनों से दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। इजरायली सेना ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि उसके सैनिक दक्षिणी लेबनान में तैनात रहेंगे। सेना ने वहां के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर रखा है, जिसके कारण हजारों स्थानीय लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

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