जयपुर , अप्रैल 23 -- राजस्थान में पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने भीषण गर्मी के मद्देनजर पशुओं के रखरखाव, पोषण एवं स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाये जाने के निर्देश दिए हैं वहीं पशुपालकों से सचेत और जागरूक रहने की अपील की है।

श्री कुमावत ने गुरुवार को यह निर्देश दिए और कहा कि राज्य में तेज गर्मी की शुरुआत हो चुकी है और आगामी दिनों में तापमान बढ़ने के साथ लू और तापघात के कारण पशुधन के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है। गर्मी के कारण पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने से विभिन्न संक्रामक रोग की संभावना भी रहती है। खासकर दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर गर्मी का बहुत असर पड़ता है। अधिक गर्मी के कारण दुधारू पशु अक्सर जल्दी बीमार पड़ते हैं और दूध देना कम कर देते हैं. इसके कारण पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पशुओं की देख भाल को लेकर समय समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं पशुपालक उन निर्देशों का पालन करें। जरूरत पड़ने पर अपने नजदीक के पशु चिकित्सालय या उप केंद्र में संपर्क करें।

विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने भी सभी जिला पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अपने क्षेत्रों में पशुधन के लू और तापघात से बचाव के लिए विशेष प्रयास करें, पशुपालकों को जागरूक करें और सभी उपयोगी जानकारियों को विभिन्न प्रचार माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पशुपालकों की जागरूकता तथा समय पर उठाए गए कदम पशुधन को लू से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने निराश्रित पशुओं के लिए पशु आश्रय स्थलों, चारागाहों और रास्ते में उपयुक्त स्थानों पर जलकुंडों और पक्षियों के लिए जन सहभागिता से सभी उपयुक्त सार्वजनिक स्थानों और घरों में परिंडे लगाने के लिए आमजन और स्वयंसेवी संगठनों को प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं जिससे पशु पक्षियों को पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि स्थापित किए गए जल कुंडों एवं परिंडों में नियमित रूप से जल भराव सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, गौशालाओं, सामाजिक संगठनों एवं जन सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि इन व्यवस्थाओं का सतत संचालन बना रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित