जयपुर , जून 13 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने लुप्त होती दृश्य और प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने के निर्देश दिए हैं।
श्री बागडे ने शनिवार को गोवा में आयोजित पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र की शाषी परिषद् की बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा, दमन दीव, गुजरात आदि की लोक कलाओं के दस्तावेजीकरण कर उनके संरक्षण के साथ ऐसी कलाओं को रोजगार से जोड़ पारम्परिक कलाकारों को प्रोत्साहित किए जाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक वस्त्रों, घरेलू सज्जा और विश्व कला बाज़ार में हमारी आंचलिक कलाओं को कैसे पहचान मिले और कैसे इससे पारम्परिक कलाकारों को अधिकाधिक लाभान्वित किया जा सकता है, इस पर विशेष रूप से कार्य किया जाए।
श्री बागडे ने कहा कि पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र निरंतर यह प्रयास करे कि हमारी आंचलिक कलाओं को वैश्चिम स्तर पर मंच मिले। उन्होंने कहा कि लोक कलाओं से ही आधुनिक कलाओं का संसार बना है, इसलिए उनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बैठक में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की और कहा कि केन्द्र नियमित गतिविधियों के रूप में कला आयोजन तो कराए ही परन्तु कलाकारों की कला को विश्व स्तर पर स्थापित कैसे किया जाए, इस पर भी विशेष रूप से कार्य करे। इसके लिए उन्होंने आंचलिक कलाओं की बाजार संभावनाओं, विपणन से जुड़ी क्रियाओं और कलात्मक बोध जगाने से जुड़े आयोजन अधिकाधिक कराये जाने की आवश्यकता जताई।
राज्यपाल को बैठक में बताया गया कि एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2026 तक पश्चिम क्षेत्र सांस्कृति केन्द्र द्वारा 114 कोर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर 5 हजार 961 कलाकारों को लाभान्वित किया गया है। शिल्पग्राम के प्रति लोगों की रूचि बढ रही है तथा वहां आने वालों में प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बैठक में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू भी मौजूद थे।
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