लुधियाना , अगस्त 06 -- पंजाब में लुधियाना के गुरु नानक भवन में गुरुवार को आयोजित कांग्रेस के 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' कार्यक्रम के दौरान पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गयी।

कार्यक्रम में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु के समर्थकों के बीच नारेबाजी हुई। इस दौरान भारत भूषण आशु और सिमरजीत सिंह बैंस के समर्थकों के बीच टकराव की स्थिति भी बन गयी, हालांकि समय रहते मामला शांत करा दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यक्रम शुरू होने से पहले भारत भूषण आशु के समर्थक आगे की पंक्तियों में बैठे हुए थे। जैसे ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेता मंच पर पहुंचे, आशु समर्थकों ने भारत भूषण आशु के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। बताया गया कि इन नारों पर राजा वड़िंग समर्थक, जिनमें बैंस बंधु भी शामिल थे, नाराज हो गये। इसके जवाब में 'आरएसएस वर्कर्स बाहर जाओ' के नारे लगाये गये। आशु समर्थकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि ऐसे नारे स्वयं पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष द्वारा लगाये जाते हैं, तो यह उचित नहीं है।

भारत भूषण आशु के करीबी सहयोगी ईश्वरजोत चीमा ने दावा किया कि वे सभी सद्भावना के साथ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। उनके अनुसार, जब सिमरजीत सिंह बैंस को मंच से बोलने के लिए माइक दिया गया तो आशु समर्थकों ने केवल भारत भूषण आशु के समर्थन में नारे लगाये थे। उन्होंने कहा कि न तो श्री भूपेश बघेल और न ही श्री राजा वड़िंग के खिलाफ कोई नारे लगाये गये।

श्री चीमा ने आरोप लगाया कि स्थिति को शांत कराने के बजाय राजा वड़िंग स्वयं नारे लगाने लगे, जिससे दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं का माहौल गर्म हो गया। उन्होंने कहा कि स्थिति बिगड़ने से पहले ही उनके समर्थकों ने कार्यक्रम स्थल छोड़ने का फैसला किया।

करीब 40 मिनट तक चले इस कार्यक्रम के बाद भारत भूषण आशु समर्थकों ने घटनाक्रम पर नाराजगी जतायी और अपनी शिकायत कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के समक्ष भी रखी।

कार्यक्रम में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी एवं महासचिव भूपेश बघेल तथा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष एवं लुधियाना से सांसद राजा वड़िंग ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान व्यवधान डालने की कुछ कोशिशों के बावजूद सभा करीब दो घंटे तक सुचारु रूप से चली।

अपने संबोधन में श्री बघेल ने पार्टी में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है और ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में व्यवधान डालने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

श्री बघेल ने कहा कि कांग्रेस के बाहरी विरोधियों की पहचान सभी को है, लेकिन पार्टी के भीतर "स्लीपर सेल" और "आंतरिक साजिशकर्ताओं" को भी बेनकाब कर बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम है, जिसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में कांग्रेस के कार्यक्रमों को लगातार जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है और इससे स्पष्ट है कि राज्य में कांग्रेस की वापसी तय है।

श्री बघेल ने भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों दल जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की। बघेल ने कहा कि आज पंजाब में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।

इस अवसर पर राजा वड़िंग ने भी कार्यक्रम में व्यवधान डालने वालों पर निशाना साधा। बिना किसी का नाम लिये उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने विरोध किया, उनमें से कुछ की उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर उस समय मदद की थी जब वे विजिलेंस मामलों का सामना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक नेता को तो उन्होंने स्वयं विजिलेंस हिरासत से बाहर निकलवाने में मदद की थी, लेकिन वही आज उनके खिलाफ नारे लगा रहा है।

राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में व्यवधान डालने वाले लोग आरएसएस के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी एक नेता की निजी जागीर नहीं है, बल्कि यह पूरे कार्यकर्ताओं की पार्टी है और सभी का इसमें समान अधिकार है।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने के सुझाव पर राजा वड़िंग ने कहा कि जो पहले ही राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुका है, उसके खिलाफ लड़ने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के खिलाफ मुकाबला करना है तो वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ होना चाहिए।

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