नयी दिल्ली, सितंबर 21 -- भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 88 लाख लोग डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) के साथ जी रहे हैं जिसमें अल्जाइमर रोग सबसे आम रूप है। यह आंकडा 2036 तक बढ़कर दोगुना यानी लगभग 1.69 करोड़ होने का अनुमान है, जो स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

बुजुर्गों की बढ़ती आबादी, जागरूकता की कमी और डॉक्टर से सलाह लेने में देरी के कारण देश में अल्जाइमर रोग के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। अल्जाइमर बीमारी सामान्य लक्षण दिखने से 20 साल पहले भी शुरू हो सकती है, जब एमाइलॉयड नाम का प्रोटीन दिमाग में असामान्य रूप से थक्के या गांठें बनाने लगता है। अल्जाइमर से पीड़ित लोगों के लिए, शुरुआती बदलावों को समय पर पहचानना मरीजों और उनके परिवारों को इस बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और सही देखभाल की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

चिकित्सकों ने 'विश्व अल्जाइमर दिवस' (21 सितंबर) के मौके पर दिमाग की सेहत पर ध्यान देने, याददाश्त और दिमागी क्षमता में शुरुआती बदलावों को पहचानने और सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेने की अपील की है।

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