भुवनेश्वर , अप्रैल 27 -- ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर की 'स्वत्वलिपि समिति' ने ऐतिहासिक मंदिर के रीति-रिवाजों को व्यवस्थित करने और प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अपनी सिफारिशों का एक सेट सौंपा है।

समिति की दूसरी अंतरिम रिपोर्ट ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन को पेश की गयी।

न्यायमूर्ति डॉ. दुर्गा प्रसन्न चौधरी (अध्यक्ष) और प्रोफेसर प्रफुल्ल कुमार मिश्रा (सदस्य) के इस पैनल ने लगभग 16 प्रमुख प्रस्ताव सामने रखे हैं।

ये सिफारिशें मंदिर के अनुष्ठानों में अनुशासन सुनिश्चित करने और समग्र प्रबंधन में सुधार पर केंद्रित हैं। मुख्य सुझावों में गर्भगृह और मंदिर की रसोई (रोशशाला) की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था में सुधार और सेवायतों (पुजारियों) के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। समिति ने मंदिर की हुंडी (दान पात्र) के बेहतर प्रबंधन और भूमि से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के उपाय भी प्रस्तावित किये हैं।

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में सेवायतों के लिए कल्याणकारी पहलों पर जोर दिया गया है और मंदिर के कार्यों की अधिक कुशलता से निगरानी के लिए एक समर्पित प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गयी है।

रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद कानून मंत्री हरिचंदन ने कहा कि सरकार व्यवस्थित अनुष्ठान और सेवायतों, मंदिर अधिकारियों व श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्णय लेने से पहले इन सिफारिशों का विस्तार से अध्ययन करेगी।

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