भिण्ड , जुलाई 14 -- मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य में लापता लड़कियों और गुमशुदा व्यक्तियों की बरामदगी के मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जानी चाहिए।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ भिण्ड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक गुमशुदगी के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान मामले के विवेचना अधिकारी, आलमपुर थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) ओंकार सिंह तोमर न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। न्यायालय ने जब लापता युवती की तलाश के लिए किए गए प्रयासों के संबंध में जानकारी मांगी तो उनके जवाब पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायालय ने कहा कि गुमशुदगी जैसे मामलों की जांच केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह सकती और पुलिस को हरसंभव वैज्ञानिक एवं प्रभावी तरीके अपनाने चाहिए।
खंडपीठ ने भिण्ड पुलिस अधीक्षक को वर्तमान विवेचना अधिकारी को 24 घंटे के भीतर प्रकरण से हटाकर जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधीक्षक से अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत कर मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है। न्यायालय ने यह भी कहा कि गुमशुदगी के मामलों को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए तथा पुलिस को ऐसे मामलों में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
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