चेन्नई , अगस्त 02 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 2007-08 के 1.97 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के दो पूर्व अधिकारियों सहित आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी है।

सीबीआई की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार दोषियों में एसबीआई की चेंगम शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एन. गोपालकृष्णन, ग्रामीण विपणन एवं वसूली अधिकारी पी. बालामुरली तथा निजी व्यक्ति आर. वेंकटरमण, एस. रवि, डी. शंकर, आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन शामिल हैं।

अदालत ने एन. गोपालकृष्णन, पी. बालामुरली, आर. वेंकटरमण, एस. रवि और डी. शंकर पर 50-50 लाख रुपये तथा आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सीबीआई ने यह मामला 23 सितंबर 2011 को एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक (रीजन-5), चेंगलपट्टू की शिकायत पर दर्ज किया था। आरोप था कि अक्टूबर 2007 से मई 2008 के बीच एसबीआई की चेंगम शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एन. गोपालकृष्णन, उप प्रबंधक (अग्रिम) के. रविचंद्रन और विपणन एवं वसूली अधिकारी पी. बालामुरली ने कंथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के स्वामी के. पुरुषोत्तमन तथा अन्य के साथ मिलकर 728 डेयरी ऋण स्वीकृत किये।

जांच में आरोप है कि कथित उधारकर्ताओं के नाम पर जाली आवेदन पत्र और ऋण दस्तावेजों के आधार पर त्रिपक्षीय व्यवस्था के तहत कुल 2.32 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए। इस दौरान ऋण स्वीकृति से पूर्व और बाद की अनिवार्य औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया, जिससे बैंक को 1.97 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

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