श्रीनगर , मई 23 -- श्रीनगर से सांसद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट नेता रूहुल्लाह मेहदी ने शनिवार को लद्दाख के नागरिक समाज समूहों और केंद्र सरकार के बीच हुए "समझौते" को जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व के "गाल पर तमाचा" बताया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने यह दिखा दिया है कि निरंतर संघर्ष के माध्यम से अधिकारों को कैसे हासिल किया जा सकता है।
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने और पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित किये जाने के बाद लद्दाख को तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य से अलग करके एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) द्वारा लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली और संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रदान करने पर केंद्र के साथ एक "सैद्धांतिक" सहमति बनने की रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये सांसद रूहुल्लाह ने कहा कि इस उपलब्धि ने अपने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने में जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व की विफलता को उजागर कर दिया है।
श्री रूहुल्लाह ने संवाददाताओं से कहा, "यह जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व के गाल पर एक तमाचा है। अगर लद्दाख जैसे छोटे से क्षेत्र का नेतृत्व भारत सरकार के खिलाफ लड़कर अपने अधिकार हासिल कर सकता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व ऐसा न कर सके।" उन्होंने आगे कहा कि वह पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेतृत्व पर एक गंभीर राजनीतिक संघर्ष शुरू करने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं पिछले पांच-छह सालों से यही कह रहा हूं कि जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व लड़ाई नहीं लड़ रहा है। लद्दाख के लोगों ने हमें दिखाया है कि कैसे लड़ा जाता है।"यह टिप्पणियां एलएबी और केडीए की उस घोषणा के बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली और नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रदान करने पर भारत सरकार के साथ एक सैद्धांतिक सहमति पर पहुंच गये हैं। लद्दाख के ये दोनों संगठन 2021 से केंद्र सरकार के साथ अपने चार सूत्री एजेंडे पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, लेह और कारगिल के लिए अलग संसदीय सीटें और इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक समर्पित लोक सेवा आयोग शामिल है।
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