श्रीनगर , जुलाई 18 -- केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने खेती-किसानी के काम में किसी भी तरह की रासायनिक और कृत्रिम खाद के इस्तेमाल और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस फैसले के साथ ही लद्दाख भारत का सबसे बड़ा प्रमाणित जैविक खेती का क्षेत्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा चुका है।

इस सरकारी आदेश के लागू होने के साथ ही पूरे केंद्र शासित प्रदेश में रासायनिक या कृत्रिम खादों को मंगाने, बांटने, बेचने, उसका प्रचार करने और इस्तेमाल करने पर तुरंत प्रभाव से पूरी पाबंदी लगा दी गई है। इस नियम का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर कम से कम 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

सरकारी आदेश में कहा गया है, "लद्दाख के जैविक तंत्र को सुरक्षित रखने, मिट्टी और पानी के स्रोतों को बचाने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और लद्दाख को एक आदर्श जैविक क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से लद्दाख प्रशासन ने खेती के कामों में रासायनिक या कृत्रिम खादों के लाने, बांटने, बेचने, प्रचार करने और इस्तेमाल करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। इससे इस क्षेत्र में खेती को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखा जा सकेगा।"लद्दाख में किसानों और खेती से जुड़ी संस्थाओं को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में केवल जैविक खादों और प्राकृतिक साधनों का ही इस्तेमाल करें।

लद्दाख को पूरी तरह से जैविक क्षेत्र में बदलने के उद्देश्य से लिया गया यह ऐतिहासिक फैसला उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देशों पर आया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद लद्दाख के नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा करना, मिट्टी और पानी के साधनों को बचाना, जैविक फसलों की साख को मजबूत करना और इस केंद्र शासित प्रदेश को एक मिसाल के रूप में स्थापित करना है।

उपराज्यपाल सक्सेना का इस सिलसिले में कहना है कि लद्दाख को एक साफ-सुथरा पर्यावरण, समृद्ध जैव-विविधता, अनोखा मौसम और पारंपरिक खेती की विरासत मिली है, जो काफी हद तक रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल से बची रही है। रासायनिक और कृत्रिम खादों पर यह पाबंदी लद्दाख को पूरी तरह से जैविक प्रदेश बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है। यह मुहिम हमारे नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा करेगी, लद्दाख की जैविक फसलों की कीमत बढ़ाएगी, अच्छे बाजारों के जरिए किसानों की आमदनी में सुधार करेगी और लद्दाख को दुनिया भर में ऊंचे पहाड़ी इलाकों पर पर्यावरण के अनुकूल की जाने वाली टिकाऊ खेती का एक वैश्विक मॉडल बनाएगी।

गौरतलब है कि लद्दाख अपने अनोखे मौसम और सदियों पुरानी पारंपरिक खेती के तरीकों को देखते हुए काफी समय से जैविक खेती को बढ़ावा देने में जुटा हुआ है। लद्दाख को एक प्रमाणित जैविक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है, और अब तक लद्दाख के 207 गांवों को पहले ही जैविक प्रमाणीकरण के दायरे में लाया जा चुका है।

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