श्रीनगर , जुलाई 14 -- लद्दाख प्रशासन ने संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में गैर-कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए 12 मोटरसाइकिल सवारों और एक एसयूवी चालक पर पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में ऑफ़-रोडिंग करने वाले मोटरसाइकिल समूह के खिलाफ यह प्रशासन की पहली बड़ी कार्रवाई है।

अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई वन्यजीव-संरक्षित क्षेत्रों में गैर-कानूनी ऑफ़-रोडिंग की बढ़ती समस्या के खिलाफ की गयी है, जिससे लद्दाख के नाजुक पारितंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने बताया कि 12 मोटरसाइकिल सवारों पर त्सो मोरीरी (झील मोरीरी) के पास संरक्षित क्षेत्रों में गैर-कानूनी रूप से जाने के लिए प्रति व्यक्ति 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि पैंगोंग झील के पास वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के नियमों का उल्लंघन करने पर एक एसयूवी ड्राइवर पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

अधिकारियों के अनुसार गत चार जुलाई को वन्यजीव अधिकारियों ने गुरुग्राम स्थित टूर ऑपरेटर 'वेंडरॉन एक्सपीरियंस प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े 12 मोटरसाइकिल सवारों के एक समूह को चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील वेटलैंड, त्सो मोरीरी के पास ऑफ़-रोडिंग करते हुए पकड़ा। इस समूह ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 29 का उल्लंघन किया था, जो अभयारण्यों के भीतर वन्यजीवों के आवास को नष्ट करने या उनमें बाधा डालने पर रोक लगाती है। समूह द्वारा कुल 1.20 लाख रुपये (प्रति मोटरसाइकिल 10,000 रुपये) का जुर्माना भरने के बाद अधिनियम की धारा 54 के तहत मामले का निपटारा किया गया।

एक अन्य घटना में गत 30 जून को वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने पैंगोंग झील के किनारे 'मान गांव' के पास नियमित गश्त के दौरान उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक महिंद्रा एसयूवी को रोका, जिसे चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के भीतर ऑफ़-रोड चलाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि वाहन को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 50 के तहत ज़ब्त कर लिया गया। उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी वाहन चालक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और जुर्माना भरने के बाद वाहन को छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि हाल के वर्षों में मोटरसाइकिल यात्राओं के लिए लद्दाख की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। वहीं एडवेंचर टूरिज्म के बढ़ने के साथ ही सुरक्षित वेटलैंड्स, झील के किनारों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में गाड़ी चलाने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख के पहाड़, झीलें, नदियां और वन्यजीव वहां की सबसे बड़ी धरोहर हैं और ये सिर्फ वहां के लोगों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की हैं।

श्री सक्सेना ने कहा, "हम लद्दाख की बेमिसाल खूबसूरती, संस्कृति और मेहमाननवाज़ी का अनुभव करने आने वाले हर पर्यटक का दिल से स्वागत करते हैं। मैं सभी पर्यटकों से गुज़ारिश करता हूं कि वे हमारे शानदार नज़ारों और अनोखे वन्यजीवों का ज़िम्मेदारी से आनंद लें और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचें जिससे हमारे नाज़ुक पर्यावरण को नुकसान पहुंचे या सुरक्षित इलाकों में कोई खलल पड़े। प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देना जारी रखेगा, लेकिन साथ ही, हम उन लोगों के खिलाफ़ सख्ती से कानून लागू करेंगे जो लद्दाख की अनमोल प्राकृतिक धरोहर को खतरे में डालते हैं।"हाल ही में लद्दाख पर्यावरण संरक्षण बल (ईपीएफ) की तैनाती के बाद इस पहल को और तेज़ी मिली है। इस बल में 100 पूर्व सैनिक शामिल हैं, जिन्हें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों का मौके पर ही चालान काटने का अधिकार दिया गया है।

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