लेह , मई 03 -- लद्दाख के महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र (एमआईएमसी) में 2569वीं वैशाख बुद्ध पूर्णिमा समारोह के अवसर रविवार को अंतरराष्ट्रीय हिमालयी बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारत और विदेशों के भिक्षुओं, विद्वानों और आध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस सम्मेलन में भाग लेते हुए बौद्ध धर्म की वैश्विक भूमिका पर चर्चा की तथा कहा, "भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक यात्रा उत्तर प्रदेश की पवित्र धरती से शुरू हुई थी और आज भी यह दुनिया भर के करोड़ों लोगों को प्रेरित कर रही है। हम विश्व भर के अनुयायियों को उत्तर प्रदेश से अपनी 'बोधि यात्रा' शुरू करने के लिए आमंत्रित करते हैं।"सम्मेलन का मुख्य आकर्षण भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों (अस्थि अवशेषों) का सार्वजनिक प्रदर्शन है, जो 14 मई तक दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। ये अवशेष 1898 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा में मिले थे, जिन्हें तथागत बुद्ध की विरासत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में से एक माना जाता है।
श्री सिंह ने उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राज्य में बौद्ध स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या 2022 में 22.4 लाख थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 82 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार बौद्ध पर्यटन बुनियादी ढांचे में 2023 से 2026 के बीच लगभग 226 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।
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