लेह , जुलाई 07 -- लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने मंगलवार को एक अंतरिम भूमि-उपयोग नियामक ढांचे को मंजूरी दे दी। इसके तहत नगर पालिका समिति की सीमाओं के भीतर आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक या मिश्रित उपयोग के उद्देश्यों के लिए दो कनाल तक की भूमि का उपयोग बिना किसी मंजूरी के करने की अनुमति दी गई है।
अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भूमि उपयोग पर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को दूर करना है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गयी है कि लद्दाख में अधिसूचित मास्टर प्लान के अभाव में नागरिकों को भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त करने में कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह निर्णय एक बड़े नियामक अंतर को संबोधित करता है, जो अधिसूचित मास्टर प्लान और क्षेत्रीय विकास योजनाओं की अनुपस्थिति के कारण मौजूद था। इसके तहत नगर पालिका क्षेत्रों के भीतर भूमि पर की जाने वाली गतिविधियों की प्रकृति आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक या मिश्रित उपयोग के संबंध में कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।
अधिकारियों ने कहा कि इस वजह से भवन निर्माण की अनुमति चाहने वाले और वैध विकास गतिविधियां करने वाले नागरिकों के लिए अक्सर अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती थी।
उपराज्यपाल ने लोगों की असुविधा को देखते हुए एक पारदर्शी, मांग-आधारित अंतरिम ढांचा स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। आदेश में कहा गया है, "केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में नगर पालिका समितियों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए, विकासात्मक प्रस्ताव और भवन निर्माण की अनुमति/आवेदन को केवल मास्टर प्लान/क्षेत्रीय विकास योजनाओं की अनुपलब्धता के आधार पर नहीं रोका जाएगा। नगर पालिका क्षेत्र के भीतर दो कनाल तक की भूमि का उपयोग आवासीय/वाणिज्यिक/औद्योगिक/मिश्रित उपयोग के लिए किया जा सकता है। इस उपयोग के लिए प्राधिकरण से मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।"उपराज्यपाल ने कहा, "लद्दाख के दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए योजनाबद्ध शहरी विकास जरूरी है। अधिसूचित मास्टर प्लान की अनुपस्थिति उन नागरिकों के लिए बाधा नहीं बननी चाहिए जो घर बनाना चाहते हैं, व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं या वैध विकास गतिविधियां करना चाहते हैं। यह अंतरिम ढांचा पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ विकासात्मक आवश्यकताओं को संतुलित करता है और मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिए जाने तक नियामक स्पष्टता प्रदान करता है।" वर्तमान में, लद्दाख में कोई शहरी विकास प्राधिकरण नहीं है, जो मास्टर प्लान और क्षेत्रीय विकास योजनाओं को तैयार करने और अधिसूचित करने के लिए एक वैधानिक पूर्व-आवश्यकता है। इस वजह से लद्दाख में शहरी विकास और भवन निर्माण की अनुमति वर्तमान में 'लद्दाख बिल्डिंग बाय-लॉज, 2025' के माध्यम से विनियमित होती हैं।
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