धमतरी , अगस्त 19 -- छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच राज्य के प्रमुख जलाशयों में शामिल रविशंकर सागर (गंगरेल बांध) का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बांध 87 फीसदी से अधिक भर चुका है और इसके कैचमेंट क्षेत्र में बारिश का सिलसिला जारी रहने से पानी की आवक लगातार बनी हुई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।गंगरेल बांध के साथ मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर बांधों में भी जलभराव तेजी से बढ़ा है। प्रशासन के अनुसार गंगरेल में लगातार पानी की आवक हो रही है। बारिश और बांधों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सैलानियों और निचले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को नदी किनारे नहीं जाने की सख्त हिदायत दी गयी है।

जिला कलेक्टर के मुताबिक बारिश इसी तरह जारी रहने पर गंगरेल बांध के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं। इसके मद्देनजर बांध के निचले क्षेत्रों और महानदी के किनारे बसे गांवों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।

गंगरेल बांध से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। गंगरेल से 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर ही 72 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। पिछली बार बांध के गेट खोले जाने के दौरान 1.31 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिसके बाद निचले क्षेत्रों में हालात गंभीर हो गये थे।

फिलहाल महानदी में पानी की आवक 12.97 टीएमसी बतायी जा रही है और सामान्य बहाव की स्थिति है। इसके बावजूद लगातार बारिश और गंगरेल के बढ़ते जलस्तर के कारण ओडिशा सीमा तक महानदी के किनारे बसे गांवों में चिंता बनी हुई है। वर्ष 2024 में आई बाढ़ जैसी स्थिति दोबारा बनने की आशंका को लेकर भी ग्रामीण सतर्क हैं।

बारिश और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर से कृषि तथा जल उपलब्धता के लिहाज से राहत की उम्मीद जगी है। इससे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने और भूजल स्तर में सुधार की संभावना है। दूसरी ओर, गंगरेल बांध के तेजी से भरने के कारण संभावित जल निकासी और उसके निचले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर प्रशासन सतर्क है। बांध के जलस्तर और पानी की आवक की लगातार निगरानी की जा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित