लखनऊ , अगस्त 12 -- उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने लखनऊ के अमीनाबाद में बिना वास्तविक दवा आपूर्ति के फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली दवाओं के कारोबार के मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। विभाग के अनुसार, जांच में 39.20 लाख जोरिल एम1 टैबलेट का हिसाब नहीं मिला है।

एफआईआर में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि संबंधित फर्मों के बीच बिना वास्तविक दवा आपूर्ति के बिलिंग कर कागजों पर खरीद-बिक्री दर्शाई गई।

विभाग के मुताबिक जांच में एमके फार्मा द्वारा वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दर्शाए जाने का मामला सामने आया। संबंधित निर्माताओं से सत्यापन में इन दवाओं की बिक्री से इनकार किए जाने और संबंधित बैचों को काउंटरफिट बताए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। जांच में 39.20 लाख जोरिल एम1 टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने के अलावा बंद फर्म के जरिए कथित कागजी लेनदेन और डेटा हटाने की बात भी सामने आई है। विभाग को आशंका है कि दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

एफएसडीए के मुताबिक लखनऊ में नकली दवाओं और फर्जी बिलिंग के खिलाफ पहले भी कई कार्रवाई हो चुकी हैं। जुलाई में अमीनाबाद के एक अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। विभाग अब पूरे नेटवर्क, फर्जी रिकॉर्ड, दवाओं की आपूर्ति और धन के लेनदेन की जांच कर रहा है तथा दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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