लखनऊ , अप्रैल 24 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और "लैब टू लैंड" की अवधारणा अब धरातल पर साकार हो चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीतियों और केंद्र-राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों के कारण प्रदेश में कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रति हेक्टेयर उत्पादन में सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन की दिशा में बढ़ते कदम इस बदलाव के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार नीतियां बनाना समय की आवश्यकता है।
"विकसित कृषि अभियान" और "खेती की बात, खेत में" जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अनुसंधान सीधे खेत तक पहुंच रहा है और किसानों, वैज्ञानिकों व कृषि छात्रों में नवाचार को लेकर उत्साह बढ़ा है। इस पहल के लिए उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिव राज सिंह चौहान का आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसानों को योजनाओं की सही जानकारी मिले, तो वे स्वयं बेहतर परिणाम देने में सक्षम हैं। वर्ष 2017 की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय प्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) निष्क्रिय अवस्था में थे, लेकिन अब उन्हें सशक्त किया गया है और सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से कृषि विकास को नई दिशा मिल रही है।
उन्होंने कृषि को वैल्यू एडिशन से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में कृषि का जीडीपी में योगदान लगभग 20-21 प्रतिशत रह गया है, जबकि इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों से नई किस्मों और आधुनिक तकनीकों का विकास हो रहा है। इससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन 100 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अल नीनो का प्रभाव गेहूं और उद्यान फसलों पर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने, बेहतर बीज उपलब्ध कराने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री ने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित शैक्षिक योग्यता के बावजूद वैज्ञानिक खेती अपनाकर वे कम लागत में अधिक उत्पादन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की 85-86 प्रतिशत भूमि सिंचित है, किसानों को पर्याप्त बिजली और बेहतर कनेक्टिविटी मिल रही है। इसके चलते कई जिलों में किसान अब एक की बजाय तीन-तीन फसलें ले रहे हैं और मक्का जैसी फसलों से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा बीज, जानकारी और खरीद केंद्रों की उपलब्धता से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल और 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है।
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