लखनऊ , अगस्त 11 -- उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर राज्यपाल को पत्र लिखा है और उनसे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और इसे प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाने का आग्रह किया है।
श्री राय ने पत्र में कहा कि हाल ही में करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को आधुनिक और तेज यातायात की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के धंसने, बड़े गड्ढे होने, जल निकासी की खराब व्यवस्था तथा पुलों के हिस्सों और क्रैश बैरियर में दरारें आने की खबरें सामने आने लगीं।
उन्होंने कहा कि मरम्मत के बाद भी सड़क की स्थिति फिर खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उद्घाटन के दो दिन बाद ही इस मार्ग पर एक गंभीर दुर्घटना में बाइक सवार की मौत भी हुई।
श्री राय ने कहा कि स्थिति गंभीर होने के कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली रोकनी पड़ी। इससे सरकार को करीब 575 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता के करीब 4,200 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण के इतने कम समय बाद ही सड़क की स्थिति खराब क्यों हो गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनी के संबंध में सामने आ रही राजनीतिक निकटता की खबरों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
श्री राय ने राज्यपाल के हाल में गोरखपुर में प्रशासन और जनसुविधाओं की स्थिति को लेकर व्यक्त किए गए विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल प्रदेश की जनता के हितों और अधिकारों के प्रति सजग हैं। ऐसे में लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाली के मामले में भी उनकी ओर से आवाज उठाया जाना अपेक्षित है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में उद्घाटित हुई थी और इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा एनएचएआई से जुड़ी है। इसलिए राज्यपाल को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष इस मामले को उठाना चाहिए।
श्री राय ने राज्यपाल से स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण की गुणवत्ता की जांच और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों, संबंधित मंत्रालय और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सड़क उद्घाटन के इतने कम समय में खराब क्यों होने लगी और इसकी कीमत जनता को क्यों चुकानी पड़ रही है।
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