उदयपुर , फरवरी 15 -- राजस्थान में उदयपुर में महाराणा मेवाड फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने यहां सिटी पैलेस म्यूजियम के ऐतिहासिक छोटा दरिखाना में लकड़ी से बनी अनुष्ठानिक विरासत प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
भारत में पहली बार उदयपुर सिटी पैलेस में प्रस्तुत इस विशिष्ट प्रदर्शनी में बेनिन, टोगो और नाइजीरिया से लकड़ी और धातु से निर्मित 40 से अधिक अनुष्ठानिक वस्तुओं को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। ये कलाकृतियाँ पश्चिम अफ्रीका की मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं की एक महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करती हैं।
इस अवसर पर डॉ. मेवाड़ ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि धरोहर, कला और विरासत का सम्मान है। जो भारतीय संस्कृति 'वसुधैव कुटुम्बकम' को चरितार्थ करती है। यह वैश्विक स्तर पर सार्वभौमिक भाईचारे, एकता, सम्मान और परस्पर जुड़ाव को बढ़ावा देने में मेरे पुरखों द्वारा स्थापित फाउंडेशन के सफल प्रयास है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर श्रीमती निवृत्ति कुमारी मेवाड़, प्रोफेसर फिलिप शालिये और डॉ. तुलिका गुप्ता सहित देश-विदेश के कई अतिथि उपस्थित रहे। प्रदर्शनी के संग्रहाध्यक्ष प्रो. फिलिप शालिये ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य यह दर्शाना है कि अनुष्ठानिक परंपराएं किस प्रकार मानव, प्रकृति और देवत्व के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होती हैं। यह विचार भारतीय सांस्कृतिक एवं दार्शनिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है, जहाँ अनुष्ठान और आध्यात्मिकता जीवन का अभिन्न अंग रहे हैं।
यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 14 अप्रैल तक आयोजित होगी। प्रदर्शनी प्रो. फिलिप शालिये द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। प्रदर्शनी का आयोजन महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन उदयपुर, एलायंस फ्रांसेज जयपुर और फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया के सहयोग से किया गया है।
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