मुंबई , जुलाई 10 -- महाराष्ट्र विधानमंडल ने संसदीय लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सदन के पटल पर दिए गए सरकारी आश्वासनों पर नज़र रखने और उन्हें तेजी से पूरा करने के लिए एक समर्पित डिजिटल मंच आधिकारिक तौर पर शुरू किया है।
यह पहल सदन के पटल पर की गयी उन सैकड़ों घोषणाओं के बढ़ते बैकलॉग के सीधे जवाब के रूप में आयी है, जिनमें से कुछ दो दशकों से अधिक समय से लंबित हैं और अब तक अधूरी रही हैं।
सदन के पटल पर दिये गये विधायी आश्वासनों का वैधानिक महत्व होता है, जिसके स्थापित नियमों के अनुसार उन्हें 90 दिनों के भीतर पूरा करना आवश्यक होता है , हालांकि प्रशासनिक बाधाओं के कारण बड़े पैमाने पर काम लंबित हो गया, जिससे सैकड़ों वादे अधूरे रह गये।
इस पहल के बारे में बात करते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि इस सॉफ्टवेयर को प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, "यह प्रणाली हर आश्वासन की वास्तविक स्थिति की अद्यतन जानकारी प्रदान करेगी, जिसमें उसके शुरू होने की तारीख, जिम्मेदार विभाग और कार्यान्वयन का वर्तमान स्तर शामिल होगा। प्रत्येक विभाग को इसकी पहुंच प्रदान कर दी गयी है और अब उन्हें अपनी प्रगति सीधे इस पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।"यह कदम विधायी प्रशासन की कार्यकुशलता पर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। हाल के आंकड़े एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करते हैं कि फरवरी-मार्च 2026 के बजट सत्र की कार्यवाही को वर्तमान मानसून सत्र शुरू होने से ठीक 8 दिन पहले संसदीय कार्य विभाग को भेजा गया था। अकेले बजट सत्र से ही विधानसभा में 2 हजार से अधिक और विधान परिषद में 324 आश्वासन उत्पन्न हुए थे, ऐसे में इस तरह के विलंब ने अंतर-विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।
राज्य सरकार ने इस डिजिटल बदलाव को पूरा करने के लिए औपचारिक निर्देश जारी कर सभी विभागों को समर्पित आंतरिक समितियां स्थापित करने को कहा है। इन समितियों के लिए लंबित आश्वासनों की समीक्षा करने के लिए हर 15 दिन में बैठक करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें विशेष रूप से उन आश्वासनों को प्राथमिकता दी जायेगी जो दो वर्षों से अधिक समय से अनसुलझे हैं।
ऐतिहासिक रूप से, इन वादों पर नज़र रखने के लिए जिम्मेदार विधानमंडल की आश्वासन समिति अनियमित बैठकों और डेटा-आधारित अनुवर्ती कार्रवाई की कमी से जूझती रही है। इस नये डिजिटल ढांचे का उद्देश्य केवल "कागजों पर" रहने वाले वादों की इस संस्कृति को समाप्त करना है।
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