प्रयागराज , जून 18 -- उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में शिक्षकों ने गुरुवार को सिविल लाइंस के पत्थर गिरजाघर स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना दिया। शिक्षकों ने कहा है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की बाध्यता कतई उचित नहीं है। धरना दे रहे शिक्षकों का कहना है कि टीईटी के अनिवार्यता से शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। क्योंकि शिक्षक पहले अपनी नौकरी बचाने के लिए खुद पढ़ाई कर रहे हैं। जिसका सीधे तौर पर असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि 50 साल की उम्र पार कर चुके शिक्षक का पढ़ाई नहीं कर सकते हैं क्योंकि उनके बैठने और पढ़ने की क्षमता खत्म हो जाती है।

शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता किए जाने से वह काफी मानसिक दबाव में हैं और उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। धरना दे रहे शिक्षकों ने यह भी दलील दी है कि जिस समय वह सेवा में आए थे भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे। वह अर्हता को पूरी करते थे। शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार इस मामले में अदालत में पैरवी करे और पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाए।

शिक्षकों ने यह भी कहा है कि अब तक सरकार से उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला है लेकिन अगर उनकी इस मांग को सरकार नहीं मानती है तो आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर संगठन जो भी निर्णय लेगा उसके तहत आंदोलन और विरोध प्रदर्शन को बाध्य होंगे। टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन भी प्रेषित किया है।

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