ऋषिकेश , अप्रैल 23 -- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि रोगी का विश्वास बनाए रखना एक डॉक्टर की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
श्री राधाकृष्णन ने यह बात यहां स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) छठवें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को कही। श्री राधाकृष्णने बतौर मुख्य अतिथि इस समारोह में शामिल हुए और विभिन्न पाठ्यक्रमों के 386 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर 11 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया।
इस दौरान कहा कि चिकित्सक बनने के साथ ही समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। रोगी का विश्वास बनाए रखना एक डॉक्टर की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया तथा अपने शिक्षकों और माता-पिता के योगदान को जीवनभर याद रखने की सलाह दी।
इस समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, एम्स अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह तथा डीन एकेडमिक प्रो. डॉ. सौरभ वार्ष्णेय उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने न केवल देशवासियों की रक्षा की, बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश आधुनिक चिकित्सा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि रोगी का विश्वास ही चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिकित्सा पेशे को मानवता की सेवा बताते हुए नव स्नातक चिकित्सकों से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सेवा देने का आह्वान किया। वहीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का सशक्त माध्यम है और चिकित्सकों को निरंतर ज्ञान अद्यतन रखना चाहिए।
समारोह का संचालन डॉ. मनु मल्होत्रा एवं डॉ. जयंती पंत ने किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, नरेश बंसल सहित कई जनप्रतिनिधि और संस्थान के फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित