हैदराबाद , अप्रैल 30 -- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में थुम्मडिहट्टी बैराज की रणनीतिक उपयोगिता बताते हुए इसके निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी के साथ सिंचाई इंजीनियरों और विशेषज्ञों के साथ परियोजना के तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की।

अधिकारियों ने प्रस्तावित बैराज की ऊंचाई और जल उपयोग की क्षमता पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि राज्य प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना पर पहले ही लगभग 11,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है और कई हिस्सों में 71.5 किलोमीटर नहर का काम पूरा हो चुका है।

विशेषज्ञों ने बैराज को 150 मीटर की ऊंचाई पर बनाने की सिफारिश की और कहा कि इससे मौजूदा बुनियादी ढांचे का प्रभावी उपयोग करते हुए कम से कम 100 करोड़ घन फूट पानी (टीएमसी) पानी का उपयोग संभव हो सकेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि हालांकि महाराष्ट्र पहले 148 मीटर की संरचना पर सहमत हुआ था, लेकिन 150 मीटर का डिजाइन जलमग्न होने की चिंताओं को कम करने और लागत प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस परियोजना से आदिलाबाद सहित ऊपरी क्षेत्रों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा और इससे श्रीपाद येल्लमपल्ली जलाशय में कम लागत पर गुरुत्वाकर्षण-आधारित जल हस्तांतरण की सुविधा मिलेगी।

अंतर-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए श्री रेड्डी ने अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के साथ तुरंत परामर्श शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी को केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखने का भी निर्देश दिया, ताकि वे महाराष्ट्र को समझाने और तेलंगाना के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करें। यह पत्र तुरंत भेजने का निर्णय लिया गया है और केंद्रीय मंत्री के साथ व्यक्तिगत बैठक की व्यवस्था भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रस्तावित ऊंचाई से महाराष्ट्र में कोई महत्वपूर्ण क्षेत्र जलमग्न नहीं होगा और उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो राज्य मुआवजा देने के लिए भी तैयार है।

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