भोपाल , अप्रैल 8 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जिससे प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क बनकर उभरा है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6 प्रतिशत है। रेल कनेक्टिविटी के सुदृढ़ होने से राज्य के विभिन्न हिस्सों तक आवागमन आसान हुआ है और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

प्रदेश के लिए रेलवे बजट में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान वर्ष में 15,188 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान यह औसत मात्र 632 करोड़ रुपये था।

राज्य में वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न रेल परियोजनाएं क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन का दोहरीकरण, इंदौर-मनमाड रेल लाइन निर्माण और अन्य अधोसंरचना परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से महाकौशल क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश में रेल लाइनों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कई स्टेशनों का पुनर्विकास और उन्नयन कार्य जारी है। साथ ही यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वंदे भारत ट्रेनों सहित नई रेल सेवाओं के संचालन से प्रदेश की कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। भोपाल, इंदौर सहित प्रमुख शहरों में मेट्रो सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिससे शहरी परिवहन को मजबूती मिली है।

सरकार का दावा है कि केंद्र और राज्य के समन्वय से संचालित इन परियोजनाओं के माध्यम से आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और औद्योगिक तथा व्यावसायिक गतिविधियों में विस्तार होगा।

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