रायपुर , जुलाई 25 -- छत्तीसगढ़ में रेलवे टिकट दलाली के 22 वर्ष पुराने मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी ने विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में आत्मसमर्पण कर दिया।
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) दुर्ग द्वारा लगातार की गई कार्रवाई परिजनों से संपर्क और समझाइश के बाद आरोपी भारत लौटकर शुक्रवार को अपने अधिवक्ता के साथ न्यायालय में पेश हुआ।
आरपीएफ से शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट दुर्ग में वर्ष 2004 में रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत टिकट दलाली का मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण में लक्ष्मी नगर, सुपेला निवासी तिजेंदर सिंह उर्फ टिंकू (46) के खिलाफ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर ने 18 अप्रैल 2012 को स्थायी गिरफ्तारी वारंट (पीएनबीडब्ल्यू) जारी किया था।
वारंट लंबे समय तक लंबित रहने के बाद आरपीएफ ने आरोपी की तलाश दोबारा शुरू की। वारंट में दर्ज पते पर पहुंचने पर पता चला कि आरोपी वहां नहीं रहता है। मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर टीम पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित उसके पैतृक गांव पहुंची, जहां उसके परिजनों से पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान आरोपी के माता-पिता और पत्नी ने बताया कि तिजेंदर सिंह पिछले करीब 15 साल से दुबई में रहकर ड्राइवर की नौकरी कर रहा है। इसके बाद आरपीएफ ने परिजनों को वारंट की प्रति एवं नोटिस सौंपा तथा आरोपी और उसके परिवार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। उन्हें न्यायालय में उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए समझाया गया।
इसके बाद आरोपी दुबई से भारत लौटा और 24 जुलाई को अपने अधिवक्ता के साथ विशेष रेलवे न्यायालय रायपुर में पेश हुआ। न्यायालय में उसने स्वीकार किया कि वारंट एवं नोटिस में दर्ज नाम और पता उसी का है तथा उसने अपने विरुद्ध दर्ज अपराध भी स्वीकार कर लिया।
विशेष रेलवे न्यायालय ने आरोपी को एक दिन की टीआरसी (टिल द राइजिंग ऑफ कोर्ट) की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना जमा किए जाने के बाद प्रकरण का निपटारा कर दिया गया।
आरपीएफ ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर लंबित वारंटों के तामील अभियान के तहत वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त रायपुर के मार्गदर्शन में आरपीएफ पोस्ट दुर्ग ने इस पुराने प्रकरण की फाइल पुनः खोलकर आरोपी की तलाश शुरू की थी, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया।
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