मास्को , मई 10 -- रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के प्रमुख किरिल दिमित्रीव के अनुसार तेल और गैस क्षेत्र में रूस एवं चीन के बीच बढ़ते सहयोग की संभावनाओं के कारण यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के लिए ऊर्जा परिदृश्य और भी सीमित हो गया है।

श्री दिमित्रीव की यह टिप्पणी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने शनिवार को कहा था कि रूस और चीन ने ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से गैस और तेल में सहयोग के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने के लिए 'उच्च स्तर की सहमति' बना ली है।

श्री पुतिन के बयान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री दिमित्रीव ने कहा कि इतिहास के सबसे खराब ऊर्जा संकट के दौरान यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के पास उपलब्ध ऊर्जा विकल्प अब और भी सीमित हो गए हैं।

यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच सामने आया है, जहां कई क्षेत्रों में ईंधन और औद्योगिक कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और अधिक बाधित कर दिया है। गुरुवार को तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 126 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे उच्चतम स्तर है। व्यापारियों को डर है कि अमेरिका-ईरान युद्ध बढ़ने से हॉर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो सकता है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल बेंचमार्क रातों-रात 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, हालांकि बाद में व्यापार कम होने पर यह गिरकर 115.8 डॉलर पर आ गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.7 प्रतिशत गिरकर 106 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। हालिया तनाव शुरू होने से पहले तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं।

इस बीच, अमेरिका ने कहा कि उसने अपनी रक्षा में उन हमलों के जवाब में कार्रवाई की है जिन्हें उसने 'बिना उकसावे के' किए गए ईरानी हमले बताया। दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अप्रैल में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है।

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