कीव , अक्टूबर 17 -- रूसी सेना ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाते हुए अब तक का सबसे बड़ा और भीषण हमला किया है। इस हमले में यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में स्थित 15 से अधिक प्रमुख बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे देश में बिजली संकट गहरा गया है।
इसकी जानकारी यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि रूसी सेना ने ऊर्जा नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के इरादे से केवल 12 घंटों (कल शाम सात बजे से आज सुबह सात बजे) के भीतर 320 से अधिक जेट व पेट्रोल चालित 'शाहिद' ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशंस, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए। यूक्रेन के वायु रक्षा बलों ने बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन हमलों का पैमाना इतना व्यापक था कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, हमले के कारण लुट्स्क, रिव्ने, झाइतोमीर, विन्नित्सिया, शेपेतिव्का, स्लावुटा और नेतिशिन में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा खार्किव, कीव और निप्रो जैसे बड़े क्षेत्रों में भी पावर ग्रिड को भारी क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि रूस सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले यूक्रेन को अंधेरे में धकेलने और लाखों नागरिकों को बिजली व हीटिंग से वंचित करने की साजिश रच रहा है। फिलहाल ऊर्जा कंपनियों के तकनीकी दल आपातकालीन स्तर पर बिजली बहाल करने के काम में जुटे हुए हैं।
श्री जेलेंस्की ने यूरोपीय साझेदारों का तत्काल नए सहायता पैकेज तैयार करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। वहीं, उन्होंने अमेरिका के 'लिंडसे ग्राहम अधिनियम' को नजरअंदाज किए जाने पर निराशा जताई।
उन्होंने कहा कि रूस पर कड़ा आर्थिक व राजनीतिक दबाव बनाने और युद्ध समाप्त करने के लिए यह अमेरिकी कानून बेहद कारगर साबित हो सकता था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आक्रामक देश पर से दबाव कम करने या ढील देने से पुतिन को और अधिक हमले करने का बढ़ावा मिलेगा, इसलिए शांति के लिए रूस पर सख्त प्रतिबंध और दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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