रुड़की , सितंबर 24 -- उत्तराखंड के रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (रु-टैग) की तीसरी वार्षिक समीक्षा बैठक गुरुवार को शुरू हुई।
बैठक में प्रमुख आईआईटी एवं वैज्ञानिक संस्थानों के शोधकर्ता, वैज्ञानिक और अधिकारी एकत्रित हुए हैं, ताकि रु-टैग 2.0 के अंतर्गत विकसित की जा रही तकनीकी पहलों की प्रगति की समीक्षा की जा सके, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जा सके तथा टिकाऊ और व्यापक स्तर पर अपनाई जा सकने वाली ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अजय कुमार सूद, केन्द्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) ने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को वैज्ञानिक नवाचार से आगे बढ़कर व्यावहारिकता, वहनीयता, अनुकूलनशीलता और व्यापक स्तर पर अपनाए जाने की क्षमता प्रदर्शित करनी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर सार्थक प्रभाव उत्पन्न किया जा सके। उन्होंने प्रयोगशालाओं में किए जा रहे उच्च स्तरीय अनुसंधान को ग्रामीण समुदायों, घरों, कृषि क्षेत्रों और अन्य जमीनी अनुप्रयोगों के लिए व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करने में रू-टैग की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए जमीनी स्तर पर तैनाती को मजबूत करने, सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान करने तथा आत्मनिर्भर स्थानीय उद्यम मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रो. सूद ने कहा कि ग्रामीण प्रौद्योगिकी का वास्तविक प्रभाव इस बात में निहित है कि वह प्रयोगशाला से आगे बढ़कर वास्तविक जरूरतों का प्रभावी ढंग से समाधान कर सके। रु-टैग के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियां व्यावहारिक, वहनीय, अनुकूलनशील और व्यापक स्तर पर अपनाए जाने योग्य होनी चाहिए, ताकि वे जमीनी स्तर पर स्थायी प्रभाव उत्पन्न कर सकें। इन समाधानों को ग्रामीण समुदायों के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय उद्यम मॉडल को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनई ने रु-टैग 2.0 के अंतर्गत शैक्षणिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच निर्बाध और परिणामोन्मुखी जुड़ाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने जोर दिया कि तकनीकी नवाचार किसानों, कारीगरों और ग्रामीण समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं को संबोधित करने वाला होना चाहिए तथा इसमें विश्वसनीयता, उत्पादकता, वहनीयता और अनुकूलनशीलता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, व्यापक प्रसार और दीर्घकालिक अंगीकरण के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और ग्रामीण संगठनों के बीच सहयोग के महत्व पर बल दिया।
डॉ. राकेश कौर, सलाहकार/वैज्ञानिक 'जी', प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, ने ग्रामीण समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान में प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जमीनी स्तर पर अनुप्रयोगों के लिए विकसित प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले मानकीकृत, पूर्ण रूप से सत्यापित तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
बैठक में पहले दिन की चर्चाओं में अनुसंधान और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच संबंध को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और प्रसार तंत्र में सुधार करने तथा यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया कि ग्रामीण समुदायों के लिए विकसित प्रौद्योगिकियां स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों और उन्हें टिकाऊ रूप से अपनाया जा सके।
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