नयी दिल्ली , मई 23 -- अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार को कोलकाता की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद नयी दिल्ली पहुंचे जहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
श्री रुबियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे तथा भारत में नए अमेरिकी दूतावास सपोर्ट एनेक्स भवन के उद्घाटन समारोह तथा रूजवेल्ट हाउस में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में भाषण देंगे।
यह दौरा 26 मई को नयी दिल्ली में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हो रहा है, जहां भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा हिंद-प्रशांत सुरक्षा और पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
श्री रुबियो अपनी पत्नी जेनेट डी. रुबियो और अमेरिकी प्रधान उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल के साथ कोलकाता से दिल्ली के लिए रवाना हुए।
कोलकाता में श्री रुबियो ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय का दौरा किया और मदर टेरेसा की समाधि पर कुछ समय बिताया। राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने हवाई अड्डे के अधिकारियों और कर्मचारियों से संक्षिप्त बातचीत भी की।
राजदूत गोर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मिशनरीज ऑफ चैरिटी के दौरे के लिए कोलकाता में शामिल हुआ। ऐसे क्षण हमें याद दिलाते हैं कि अमेरिका-भारत साझेदारी न केवल मजबूत नीतियों पर, बल्कि साझा मूल्यों और निस्वार्थ सेवा की भावना पर भी आधारित है जो सीमाओं से परे है।" मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी की महासचिव सिस्टर कॉन्सेटीना ने श्री रूबियो की यात्रा को व्यक्तिगत और चिंतनशील बताया। कोलकाता का दौरा करने वाली अंतिम अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन थीं, जिन्होंने मई 2012 में यह दौरा किया था।
श्री रूबियो अपनी भारत यात्रा के दौरान आगरा और जयपुर भी जाएंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यात्रा से पहले संकेत दिया था कि ऊर्जा सहयोग भारतीय नेताओं के साथ चर्चा का मुख्य केंद्र होगा, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में से एक में निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
स्वीडन और भारत के लिए रवाना होने से पहले मियामी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अमेरिका उतनी ही ऊर्जा बेचना चाहता है जितनी भारत खरीदेगा। हम उत्पादन और निर्यात के ऐतिहासिक स्तर पर हैं। हम और अधिक करना चाहते हैं।"श्री रूबियो ने कहा कि अमेरिका पहले से ही भारतीय अधिकारियों के साथ ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव से जुड़ी वैश्विक ईंधन आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
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