नैनीताल , जुलाई 31 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले के रुड़की कोतवाली क्षेत्र में हुए चर्चित हत्याकांड के दो आरोपियों जायद कुरैशी और अनस कुरैशी की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इस स्तर पर आरोपियों को जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।

यह कोतवाली रुड़की में 2025 में दर्ज हत्या के मामले से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार दोनों आरोपी सत्र परीक्षण संख्या 114/2025 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 4/25 के तहत इसका सामना कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों आरोपियों को रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में 12 लोगों को नामजद किया गया था लेकिन जांच के दौरान छह लोगों को क्लीन चिट दे दी गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले के चार अन्य सह-आरोपियों को पहले ही उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर दोनों आवेदकों को भी राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण किसी कठोर एवं कुंद वस्तु से लगी सिर की चोट बताया गया है, जबकि अभियोजन ने आरोपियों के पास चाकू और टाबल (धारदार हथियार) होने की बात कही है।

वहीं राज्य सरकार और वादी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि दोनों आरोपियों की घटना में विशिष्ट भूमिका है। अभियोजन के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर हथियार भी बरामद किए गए हैं और अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर चिकित्सीय साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों के बीच कथित विरोधाभास की विस्तृत जांच करना उचित नहीं होगा, क्योंकि ऐसा करना ट्रायल को प्रभावित करेगा। अदालत ने माना कि मामला गंभीर और जघन्य अपराध का है तथा दोनों आरोपियों की भूमिका अन्य सह-आरोपियों से अलग है। केवल इस आधार पर कि अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, इन्हें समान राहत नहीं दी जा सकती।

अदालत ने दोनों जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि चूंकि दोनों आरोपी 10 जुलाई 2025 से न्यायिक अभिरक्षा में हैं, इसलिए सत्र परीक्षण संख्या 114/2025 की सुनवाई में तेजी लाई जाए और मामले का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

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