इटावा , जुलाई 11 -- उत्तर प्रदेश के इटावा में 55 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव से विजिलेंस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में उन्होंने विभाग के 17 लोगों के नाम लिए हैं, जिन्हें रिश्वत की रकम में हिस्सा मिलता था। इस दावे के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएमओ ने मेडिकल अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम भी विजिलेंस टीम को बताए हैं। इस मामले में कानपुर की विजिलेंस टीम जल्द ही संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि कानपुर की विजिलेंस टीम ने 10 जून को डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय स्थित उनके कक्ष से 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। सिविल लाइंस थाने में करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें कानपुर ले जाया गया, जहां उनसे कई दौर में पूछताछ की गई। इसके बाद 23 जून को विजिलेंस टीम ने दोबारा इटावा पहुंचकर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की तथा डिप्टी सीएमओ कार्यालय का निरीक्षण किया।
मामला ऊसराहार निवासी नवीन कठेरिया की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी प्रिया के नाम से श्रीजी अल्ट्रासाउंड क्लीनिक के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के एवज में डिप्टी सीएमओ ने साढ़े तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद विजिलेंस टीम ने 55 हजार रुपये लेते समय डॉ. यादव को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।
सूत्रों के अनुसार, डिप्टी सीएमओ के पास अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों के पंजीकरण का प्रभार था और पंजीकरण तथा एनओसी के नाम पर संचालकों से धन की वसूली की जाती थी। यह भी दावा किया जा रहा है कि वसूली की रकम का बंटवारा निर्धारित अनुपात में किया जाता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.के. सिंह ने कबूलनामे के संबंध में कहा कि किसी भी आरोपी के बयान और कबूलनामे की अपनी कानूनी प्रक्रिया होती है और सामने आ रही सूचनाओं की सत्यता की जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
विजिलेंस की डीआईजी मंजिल सैनी ने फोन पर बताया कि 55 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार डिप्टी सीएमओ के खिलाफ 60 दिनों के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी गई है और अनुमति मिलते ही आगे की विधिक कार्रवाई पूरी की जाएगी।
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