भोपाल , सितंबर 17 -- रिश्ते की बहू के साथ दुष्कर्म और विरोध करने पर उसे तथा उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के मामले में भोपाल की विशेष न्यायालय (ओएडीडब्ल्यू) ने अभियुक्त दामोदर आदिवासी मरावी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। भोपाल जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश सुलेखा मित्रा की अदालत ने अभियुक्त पर विभिन्न धाराओं में कुल 5500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को जेल भेज दिया गया।

अभियोजन के अनुसार मामला भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र का है। जनवरी 2025 में पीड़िता की सास ने अपने रिश्तेदार दामोदर आदिवासी को किसी काम से भोपाल बुलाया था। घटना के समय पीड़िता का पति मजदूरी के लिए बाहर गया था और सास भी घर पर नहीं थी। इसी दौरान आरोपी ने पीड़िता को घर में अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती की।

पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे और उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने धमकी के भय का फायदा उठाकर अलग-अलग तारीखों में पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध उसका दैहिक शोषण किया। बाद में पीड़िता ने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद हबीबगंज पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संतोष शर्मा ने पैरवी की। न्यायालय में पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट, मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान, घटनास्थल का नजरी नक्शा तथा सागर और भोपाल की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं से प्राप्त डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अभियुक्त को दोषी पाया।

न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एफ) के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 351(3) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर क्रमशः तीन माह और एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

विशेष न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त को परिवीक्षा (प्रोबेशन) का लाभ देने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी रिश्ते में नजदीकी नातेदार था और परिवार का उस पर विश्वास था। ऐसे संबंध का दुरुपयोग कर किया गया अपराध महिला की गरिमा और सामाजिक विश्वास के विरुद्ध गंभीर कृत्य है। फैसला सुनाए जाने के बाद अभियुक्त का जेल वारंट तैयार कर उसे केंद्रीय जेल भोपाल भेज दिया गया।

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