बैतूल , जुलाई 21 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में चिचोली से भीमपुर ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने वाली 18 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य संशोधित (रिवाइज) एस्टीमेट की स्वीकृति के इंतजार में धीमी गति से चल रहा है। इस बीच मंगलवार को निर्माणाधीन मार्ग के कीचड़युक्त हिस्से में एक स्कूल बस फंस जाने की घटना के बाद सड़क निर्माण में हो रही देरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नाबार्ड योजना के तहत लगभग 36 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही इस सड़क का निर्माण कार्य तीन वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। मंगलवार को सेमलढाना के समीप लगातार बारिश के कारण दलदल में तब्दील निर्माणाधीन हिस्से में एक स्कूल बस फंस गई। बस में सवार बच्चों के घबराने पर स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद बस को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि चिचोली-भीमपुर मार्ग लंबे समय से निर्माणाधीन है और कार्य की रफ्तार लगातार धीमी बनी हुई है। बारिश के दौरान सड़क कई स्थानों पर कीचड़ में बदल जाती है, जिससे स्कूली वाहन, एंबुलेंस, यात्री वाहन और किसानों को आवागमन में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि लोक निर्माण विभाग की प्रभावी निगरानी के अभाव में निर्माण एजेंसी मनमाने ढंग से कार्य कर रही है।

जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण परियोजना को एक अक्टूबर 2023 को प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि निर्माण में विलंब का असर हजारों ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही पर पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार परियोजना का संशोधित एस्टीमेट तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रिवाइज एस्टीमेट की प्रक्रिया के कारण निर्माण कार्य की गति प्रभावित हुई है। हालांकि विभाग ने किसी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है।

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री मनीष मरकाम ने बताया कि मूल परियोजना में कुछ अतिरिक्त कार्यों की आवश्यकता सामने आई है। इनमें कुछ पुलों का निर्माण तथा कुछ हिस्सों में सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क का निर्माण शामिल है। इसी कारण संशोधित एस्टीमेट शासन को भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। विभाग ने परियोजना को पूरा करने की संशोधित समय-सीमा दिसंबर 2026 निर्धारित की है। इस बीच ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में तेजी लाने, गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराने तथा बारिश के मौसम में सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

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