नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- देश में रियल एस्टेट निवेश की गतिविधियां अप्रैल-जून 2026 के दौरान पांच तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी हैं।
बाजार अध्ययन कंपनी ग्रांट थॉर्नटन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान देश में रियल एस्टेट निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गयी। संस्थागत निवेशकों ने आवासीय परियोजनाओं में निवेश कम करते हुए वाणिज्यिक संपत्तियों में निवेश बढ़ाया।
रियल एस्टेट/रिट्स डीलट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में कुल 39 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य 2.3 अरब डॉलर रहा। यह पिछले एक वर्ष से अधिक समय में सबसे अधिक सौदा गतिविधि है। जनवरी-मार्च तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सौदों का कुल मूल्य जनवरी-मार्च तिमाही के 76.3 करोड़ डॉलर से लगभग तीन गुना बढ़ गया। इस वृद्धि का कारण निजी इक्विटी निवेश, रिट्स अधिग्रहण और पूंजी बाजार में फिर से बढ़ी गतिविधियां हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक रियल एस्टेट निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा। इस श्रेणी में 12 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य 99.7 करोड़ डॉलर रहा। इसके विपरीत, आवासीय परियोजनाओं में निवेश में भारी गिरावट आयी और इसका सौदा मूल्य क्रमिक आधार पर 88 प्रतिशत घटकर केवल 2.2 करोड़ डॉलर रह गया।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर भाविक वोरा ने कहा, "यह तिमाही वाणिज्यिक रियल एस्टेट में निवेशकों के निरंतर विश्वास को दर्शाती है। रणनीतिक अधिग्रहणों और रिट्स आधारित सौदों से स्पष्ट है कि निवेशक अल्पकालिक अवसरों की बजाय दीर्घकालिक पोर्टफोलियो निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"तिमाही के सबसे बड़े सौदों में माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रिट और 360 वन अल्टरनेट्स एसेट मैनेजमेंट द्वारा रेडियल आईटी पार्क लिमिटेड का 32.3 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण शामिल रहा। माइंडस्पेस ने इसी अवधि में एक और अधिग्रहण भी पूरा किया, जिससे तिमाही में उसका कुल निवेश 59.6 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।
निजी इक्विटी निवेशक पूंजी के सबसे बड़े स्रोत बने रहे। उन्होंने 13 सौदों के माध्यम से 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 153 प्रतिशत अधिक है।
विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियां भी मजबूत रहीं। तिमाही के दौरान 22 सौदे हुए, जिनका कुल मूल्य 36.7 करोड़ डॉलर रहा। अधिग्रहण बाजार में घरेलू निवेशकों का दबदबा रहा और विलय अधिग्रहण सौदों में उनका योगदान कुल गतिविधि का लगभग 95 प्रतिशत था।
पूंजी बाजार के माध्यम से धन जुटाने की गतिविधियों में भी सुधार देखा गया। इस तिमाही में दो प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और दो पात्र संस्थागत आवंटन (क्यूआईपी) के जरिये कुल 78.2 करोड़ डॉलर जुटाये गये।
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