मुंबई , अगस्त 8 -- केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज शहरी सहकारी बैंकों से भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्रीय बैंक ने हाल के वर्षों में इस क्षेत्र के विकास और मजबूती के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं।

यहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन करते हुए श्री शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्री के रूप में उनके पांच साल के अनुभव ने उन्हें आश्वस्त किया है कि जब भी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र ने अपने कामकाज के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का संकल्प दिखाया, रिज़र्व बैंक ने लगातार उसका समर्थन किया।

उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों के लिए रिज़र्व बैंक के उठाए कई नियामक कदमों का उल्लेख किया, जिनमें नई शाखाएं खोलने के नियमों में ढील देना, घर-तक बैंकिंग सेवाओं की अनुमति देना और डिमांड ड्राफ्ट व जीवन प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार देना शामिल है। उन्होंने कहा कि रिज़र्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक विशेष नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है।

श्री शाह ने रेखांकित किया कि शहरी सहकारी बैंकों के पास कुल मिलाकर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि है, जो देश के वित्तीय ढांचे में उनके महत्वपूर्ण योगदान और बड़ी संख्या में ग्राहकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में उनके महत्व को दर्शाती है। उन्होंने छोटे उधारकर्ताओं की साख क्षमता पर भी जोर दिया और कहा कि इस वर्ग पर सहकारी बैंकों का पारंपरिक ध्यान उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक बड़ी ताकत बन सकता है।

गुजरात में एक सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए शाह ने बताया कि बिना किसी ज़मानत के छोटे उधारकर्ताओं को ऋण दिए गए थे और इसके बावजूद बैंक ने लगभग 97 प्रतिशत की वसूली दर हासिल की थी।

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