सिलीगुड़ी , अप्रैल 14 -- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लोकतंत्र और संस्थाओं को कमजोर करने और देश तथा राज्य दोनों को आर्थिक एवं राजनीतिक संकट में धकेलने का आरोप लगाया।

श्री गांधी ने उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में एक चुनाव रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी "मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण" के बहाने पश्चिम बंगाल में "वोटों की चोरी" करने की कोशिश कर रही है ।उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक तरीकों से जीत हासिल करने में असमर्थता के कारण पार्टी कई राज्यों में इस तरह की रणनीति का सहारा ले रही है।

राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए श्री गांधी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के उदय के लिए उसे प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने ही बंगाल में भाजपा के लिए रास्ता बनाया और अगर सत्ताधारी पार्टी ने बेहतर शासन व्यवस्था का पालन किया होता तो भाजपा को यहां विस्तार करने का मौका ही नहीं मिलता।

केंद्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए श्री गांधी ने मोदी सरकार पर देश को अमेरिका के हवाले करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे भारत की औद्योगिक एवं आर्थिक संभावनाएं खतरे में पड़ रही हैं। उन्होंने आगे दावा किया कि कृषि और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्र तीव्रता से विदेशी हितों से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे किसानों और व्यापक आबादी के लिए जोखिम उत्पन्न हो रहा है।

बेरोजगारी और औद्योगिक गतिरोध पर प्रकाश डालते हुए श्री गांधी ने तृणमूल के 2021 में दिए गए पांच लाख नौकरियों के वादे का उल्लेख किया और इसकी तुलना सरकारी सहायता योजनाओं के लिए पंजीकृत बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं से की। उन्होंने कहा कि बंगाल में उद्योग ठप हो गए हैं, कारखाने बंद हो रहे हैं और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा और तृणमूल पर तीखा हमला करते हुए श्री गांधी ने दोनों पार्टियों पर हिंसा और झूठ की राजनीति"करने , दोनों दलों में व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और राज्य में तथाकथित सिंडिकेट राज पर भी कटाक्ष किया।

कांग्रेस सांसद ने अपने भाषण की शुरुआत डॉ बी. आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की और भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक संरचना को कमजोर करने के सुनियोजित प्रयासों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि वफादारों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करके संस्थाओं को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय आयाम के संदर्भ में श्री गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक प्रभाव विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हाथों में है जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत की विदेश एवं आर्थिक नीतियां बाहरी रूप से प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर व्यक्तिगत रूप से भी निशाना साधा और दावा किया कि प्रधानमंत्री उनकी आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर सकते। श्री गांधी ने आरोप लगाया कि श्री मोदी ने संसदीय बहस के दौरान उन्हें टोकने की कोशिश की थी लेकिन असफल रहने पर वह बाहर चले गए।

एपस्टीन से जुड़ी कथित फाइलों की बात करते हुए श्री गांधी ने दावा किया कि उनमें कई भारतीय मंत्रियों, भाजपा नेताओं और यहां तक कि श्री मोदी के नाम भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फायदा मिलता है । उन्होंने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अक्सर कहते थे कि वह दो मिनट में श्री मोदी का राजनीतिक करियर खत्म कर सकते हैं।

उन्होंने आगे दावा किया कि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के डर से प्रधानमंत्री मोदी "दब्बू" बने रहते हैं, और आरोप लगाया कि वह अक्सर श्री ट्रंप को "सर" कहकर संबोधित करते हैं, जबकि श्री ट्रंप उनका मजाक उड़ाते हैं। श्री गांधी ने कांग्रेस को एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए दृढ़ता से कहा कि उनकी पार्टी भाजपा और आरएसएस की विभाजनकारी राजनीति के विपरीत एकता, प्रेम और अहिंसा के लिए खड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि देश केवल सद्भाव एवं एकता के माध्यम से ही आगे बढ़ सकता है, न कि घृणा एवं संघर्ष के माध्यम से।

उन्होंने कांग्रेस के घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला जिसमें 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा कवर का प्रस्ताव शामिल है और मतदाताओं से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन करने का आग्रह किया।

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