जयपुर , जुलाई 24 -- राजस्थान में राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के सामने छह जून 2016 को रास्ता रोकने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में न्यायालय ने तत्कालीन छात्र नेता एवं वर्तमान परवतसर विधायक रामनिवास गावड़िया सहित सभी 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ भारद्वाज ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

यह मामला गांधी नगर थाने में तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) से जुड़े छात्र नेताओं एवं अन्य लोगों ने राजस्थान विश्वविद्यालय के सामने रास्ता अवरुद्ध करके यातायात प्रभावित किया और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से आरोपों का विरोध करते हुए कहा गया कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ भारद्वाज ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका। ऐसे में आपराधिक न्यायशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना उचित है। अदालत ने इसी आधार पर रामनिवास गावड़िया सहित सभी 18 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

इस मामले में आरोपियों में तत्कालीन छात्र नेता एवं वर्तमान परवतसर विधायक रामनिवास गावड़िया के अलावा राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सतवीर चौधरी, पूर्व अध्यक्ष पूजा भार्गव और अन्य छात्र नेता शामिल थे।

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