औरंगाबाद , अगस्त 07 -- 2वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड के तेलहारा गांव में खादी तथा हथकरघा को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हथकरघा उद्योग के विकास, बुनकरों के स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार वित्तीय समावेशन के माध्यम से बुनकरों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सामर्थ्य योजना के तहत कुटुंबा और नवीनगर की 30 महिलाओं को भागलपुर में प्रशिक्षण दिया गया, जो अब स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर रही हैं।

संस्था के संचालक रामदयाल पाल ने बताया कि वर्ष 2016 से संचालित हैंडलूम इकाई में छह करघों पर तौलिया, चादर, गमछा, कपड़ा और भेड़ के ऊन से कंबल तैयार किए जा रहे हैं। इस इकाई से 100 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर धागा उपलब्ध कराने, जिले में मार्केटिंग सुविधा विकसित करने तथा ऊन प्रसंस्करण मशीन लगाने की मांग भी उठाई।

खादी अभियान से जुड़े शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि ओबरा और दाउदनगर में तैयार कालीन विदेशों तक भेजे जा रहे हैं , वहीं कुटुंबा और नवीनगर क्षेत्र की महिलाओं को कताई, बुनाई और सिलाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष बुनकरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि योजनाबद्ध प्रयासों से औरंगाबाद का हथकरघा उद्योग भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।

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