नयी दिल्ली , अक्टूबर 29 -- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के विजन को साकार करने और देश में सहकारिता आधारित सर्वस्पर्शी तथा सर्वसमावेशी विकास को गति देने की दिशा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की महापरिषद की 93वीं बैठक गुरूवार को यहां के निगम के मुख्यालय में आयोजित की गयी।
यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी। इसके अनुसार बैठक को संबोधित करते हुए श्री शाह ने पिछले लगभग पाँच वर्षों में एनसीडीसी की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की और इसे निगम के लिए 'स्वर्णिम काल' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में निगम ने वित्तीय प्रदर्शन, ऋण स्वीकृतियों, संवितरण में विस्तार और नेट एनपीए को शून्य बनाए रखने जैसी अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता जताई कि एनसीडीसी की उपस्थिति अब लद्दाख और पूर्वोत्तर के दूरदराज के क्षेत्रों सहित देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुँच चुकी है।
बैठक में प्रस्तुत वित्तीय ब्योरे के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से 25 अक्टूबर 2026 तक एनसीडीसी के देशभर की सहकारी संस्थाओं को संचयी रूप से 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निगम ने 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संवितरण किया और 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। इस दौरान निगम की ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही तथा नेट एनपीए शून्य दर्ज किया गया। पिछले पाँच वर्षों में एनसीडीसी का वार्षिक वितरण लगभग पाँच गुना बढ़ा है।
भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए गृह एवं सहकारिता मंत्री ने एनसीडीसी के लिए अगले 25 वर्षों का एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिये, जिसके तहत संस्थागत ढाँचे, पूँजी जुटाने और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव किये जायेंगे। उन्होंने आगामी वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करते हुए वित्त वर्ष 2029-30 में लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये और वर्ष 2030-31 में 4 लाख करोड़ रुपये का वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने को कहा।
श्री शाह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को वर्ष 2030 तक दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सहकारी क्षेत्र के माध्यम से विशेष परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन चार क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता आने से पूर्वोत्तर की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे।
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