कोलकाता , फरवरी 14 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल सरकार के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू न करने के फैसले से उसे लगभग 10,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद का नुकसान हुआ।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के यहां आयोजित शिक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य से बार-बार एनईपी लागू करने का आग्रह किया था, लेकिन उन अपीलों को नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि यह नीति मातृभाषा में शिक्षा का पुरज़ोर समर्थन करती है और पश्चिम बंगाल के मामले में बंगला में सीखने को बढ़ावा देती। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने एनईपी न लागू करने का फैसला किया। नतीजतन बंगाल को अतिरिक्त अनुदान से वंचित रहना पड़ा, जो समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिल सकती थी।"केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने जादवपुर विश्वविद्यालय के लिए केंद्र के प्रस्तावित अतिरिक्त वित्तीय मदद लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय में राज्य में शिक्षा का स्तर खराब हुआ है। उनका कहना है कि देश में सबसे अधिक बिना शिक्षक के विद्यालय पश्चिम बंगाल में हैं।
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