मुंबई , मई 28 -- 'ग्लोबल अफेयर्स कनाडा' के साथ पंजीकृत कनाडा स्थित एक संघीय निकाय, 'कनाडाई शिक्षा परिषद' (सीईसी) भारतीय शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्कूल समूहों और सरकारी हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है।
भारत में काम कर रही कनाडाई शिक्षा परिषद की प्रवक्ता और क्षेत्रीय निदेशक (वैश्विक मामले कनाडा) सुनीता कृष्णन के अनुसार, यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुये अंतरराष्ट्रीय संबद्धता, शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षाशास्त्र, अनुपालन प्रणालियों, संस्थागत गुणवत्ता ढांचे और वैश्विक रोजगार क्षमता जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
उन्होंने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा, "भारत अपनी शैक्षणिक यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर है। एनईपी 2020 ने भविष्य के लिए एक सशक्त दृष्टिकोण तैयार किया है और वैश्विक सहयोग इसे लागू करने का समर्थन करने में एक सार्थक भूमिका निभा सकता है। हमारा ध्यान शैक्षणिक संस्थानों, नीति निर्माताओं और हितधारकों के साथ मिलकर काम करने पर है ताकि ऐसी प्रणालियां बनाई जा सकें जो शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ायें, शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार करें, शासन को मजबूत करें और विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करें, जबकि वे भारत के शैक्षणिक मूल्यों और प्राथमिकताओं के अनुरूप बनी रहें।"पिछले एक वर्ष में, कनाडाई शिक्षा परिषद ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जियो इंस्टीट्यूट, पंजाब यूनिवर्सिटी और एमिटी यूनिवर्सिटी सहित कई प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी और शैक्षणिक सहयोग शुरू किया है। इसके अलावा, सीईसी ने भारत के प्रारंभिक शिक्षा के वर्षों में सुधार करने, सख्त नीतियां लाने और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक दृष्टिकोण को शामिल करने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ हाथ मिलाया है। 'आईपीटीटीए', जो शिक्षकों को समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रारंभिक वर्षों का प्रशिक्षण प्रदान करता है, ने भी गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के साथ प्रशिक्षित शिक्षकों के काम करने को बढ़ावा देने में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने के लिए सीईसी के साथ सहयोग किया है।
सीईसी राज्य-स्तरीय सहयोग की संभावनायें भी तलाश रही है, विशेष रूप से महाराष्ट्र में, जो एनसीईआरटी, एनसीएफ, एससीईआरटी और एनईपी 2020 के ढांचे के अनुरूप प्रीस्कूल और के-12 शिक्षा के लिए गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों पर केंद्रित है। इसके व्यापक दृष्टिकोण में शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संबद्धता प्रणालियों का समर्थन करना और ऐसे मार्ग तैयार करना शामिल है जो भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक रोजगार क्षमता और शैक्षिक गतिशीलता में सुधार लाते हैं।
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